राष्ट्र रक्षा संगम कार्यक्रम में आरएसएस सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा कि सिर्फ भाषणबाजी से काम नहीं चलेगा। हमें करने की आदत डालनी होगी। इसकी शुरुआत स्वयं से फिर समाज और फिर देश स्तर पर होनी चाहिए।
संघ को लेकर लोग तरह-तरह की कल्पनाएं करते हैं। इस तरह के आयोजन को अक्सर शक्ति प्रदर्शन कहा जाता है। जबकि यह हमारा आत्म दर्शन है। लड़ाई बाहर से कम, हमारे अंदर से ज्यादा है। उन्होंने कहा कि शक्ति प्रदर्शन तो शक्तिहीन लोग करते हैं।
हमें इसकी आवश्यकता नहीं है। उन्होंने गांव-गांव संघ का विस्तार करने पर जोर दिया। साथ ही इसमें गुणात्मक सुधार की भी आवश्यकता जताई।