फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

यूपी: मोदी ने बनाया 'तख्तापलट' का प्लान!

Sat, 07 Jun 2014 10:50 AM IST
अखिलेश वाजपेयी/अमर उजाला, लखनऊ
विज्ञापन
विज्ञापन
संघ मोदी के सहारे यूपी में सत्ता परिवर्तन का सपना देख रहा है, वहीं मोदी ने भी इसके एजेंडे को आगे बढ़ाने का काम शुरू कर दिया है।
विज्ञापन


कल्याण सिंह, लालजी टंडन और केसरीनाथ त्रिपाठी को राज्यपाल बनाने की चर्चा यूं ही नहीं है। इसके पीछे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का सोचा-समझा एजेंडा है।

जिस पर अमल को मोदी और आगे बढ़ते दिख रहे हैं। पर, इस सावधानी के साथ कि एजेंडे पर अमल करते वक्त कोई ऐसी चूक न हो जाए जिससे उनकी साख और छवि पर चोट आए।

वरिष्ठों को लेकर संकोच संकट बन जाए या इनकी अनदेखी का संदेश चला जाए। यह बात सभी को पता है कि दिल्ली में सरकार बनाने के बाद अगला एजेंडा उत्तर प्रदेश ही है। इसलिए अमल भी उत्तर प्रदेश से ही शुरू होता दिख रहा है।
Trending Videos

मोहन भागवत ‌ने दिये थे संकेत

उत्तर प्रदेश में लोकसभा की 80 में 73 सीटें जीतने के बाद संघ अब यूपी विधानसभा चुनाव की तैयारी में का काम शुरू कर देना चाहता है।

सभी को याद होगा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने 2009 में संघ प्रमुख की भूमिका संभालने के साथ ही युवा एजेंडे पर चलने का संकेत दे दिया था।

उन्होंने कहा था कि दुनिया बदल चुकी है। देश भी बदल रहा है। विश्व में सबसे ज्यादा युवा हमारे देश में होने के कारण धीरे-धीरे इनकी भूमिका महत्वपूर्ण होती जाएगी।

सभी लोगों को इस बदलाव का स्वागत करना चाहिए और देश निर्माण में युवाओं को भागीदारी देने के लिए बुजुर्गों को अब अपनी भूमिका तय कर लेनी चाहिए।

मोदी ने भी दोहराया

जाहिर है कि यूपी में भाजपा की मजबूती के एजेंडे पर काम में संघ अब देरी नहीं चाहता। उसकी कोशिश है कि सफलता के उत्साह को माध्यम बनाकर संगठन की मजबूती का काम शुरू कर दिया जाए। देरी से नुकसान हो सकता है।

भागवत और मोदी सार्वजनिक रूप से कहते रहे हैं, ‘उत्तर प्रदेश में मजबूत हुए बगैर देश में मजबूत नहीं हुआ जा सकता। इस राज्य में बदलाव किए बगैर देश में बदलाव की उम्मीद नहीं की जा सकती।’

इसीलिए भाजपा को भारी सफलता मिलने और केंद्र की सत्ता बदलने में कामयाब रहने के बाद संघ ने मोदी के जरिये अपने अगले एजेंडे पर काम शुरू कर दिया है।

मोदी ने खत्म की गुटबाजी

प्रदेश में काफी दिनों से अपने-अपने लोगों को टिकट दिलाने के लिए भाजपा नेताओं में खींचतान और गुटबाजी होती थी। कई नेता खुद ही मनचाही सीट से चुनाव लड़ने का दावा ठोंककर मुश्किलें बढ़ा देते थे।

मोदी ने चुनाव की कमान मिलने के बाद अमित शाह को प्रभारी बनवाकर इस चुनौती से काफी हद तक पार पा लिया।

सूबे के कई बुजुर्ग नेताओं की टिकट वितरण में कोई भूमिका ही नहीं दिखी। नेताओं की नाराजगी की अनदेखी करके सीधे टिकट दिए। केशरीनाथ त्रिपाठी और सूर्यप्रताप शाही जैसे नेताओं को भी टिकट नहीं मिला।

ओमप्रकाश सिंह के पुत्र को टिकट नहीं मिला। संघ अब यूपी के बाकी नेताओं की भूमिका को दूसरे तरीकों से सीमित कर देना चाहता है।
विज्ञापन

संघ भी युवाओं के पक्ष में

संघ में वरिष्ठ पद संभाल चुके एक सज्जन कहते हैं, ‘लेट् न्यू ब्लड कम, लेट् दि बड्स ब्लूम’ अर्थात ‘नया खून आने दो, कलियों को खिल जाने दो।’

लालकृष्ण आडवाणी के रहते हुए नरेन्द्र मोदी का राज्याभिषेक कराकर संघ बुजुर्गों की भूमिका की असली चुनौती से पार पा चुका है। स्वाभाविक है कि बाकी का काम अब मोदी के जरिये ही करना है। यह उसी का एक हिस्सा है। अभी तो आगे और भी बहुत कुछ होना है।

कहीं से लाया जाए लेकिन यह समझ लीजिए कि यूपी में 2017 के विधानसभा चुनाव से पहले नया चेहरा सामने होगा।

सभी को पता है कि यहां भाजपा की मजबूती के लिए सिर्फ बुजुर्ग नेताओं का भार ही नहीं घटाना होगा बल्कि बल्कि प्रदेश संगठन में गुटबाजी बढ़ाने वालों का हस्तक्षेप भी कम करना है। इसलिए आने वाले दिनों में यूपी भाजपा के कई नेताओं की भूमिका बदली जा सकती है।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें