नए वित्त वर्ष के पहले दिन से मनरेगा मोबाइल पर होगी। मनरेगा में मजदूरों के काम की मांग दर्ज करने, काम आवंटित करने, मस्टर रोल भरने, कार्यस्थल पर रोजगार सेवक की हाजिरी व काम की फोटोग्राफी व जांच जैसे सभी काम मोबाइल से ऑन-स्पाट होंगे।
केंद्र ने इसके लिए ‘मनरेगा-मोबाइल मॉनीटरिंग सिस्टम (एमओएस)’ शुरू करने का फैसला किया है। पहले चरण में प्रदेश के 403 पिछड़े ब्लॉकों की 10-10 ग्राम पंचायतों का चयन किया जाएगा। ग्राम्य विकास विभाग ने इस पर कार्यवाही शुरू कर दी है।
केंद्र ने मोबाइल मॉनीटरिंग सिस्टम की जो पहल की है वह कई खूबियों से लैस होगी। ग्राम्य विकास विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यह व्यवस्था चरणबद्ध तरीके से सभी ग्राम पंचायतों में लागू करने का प्रस्ताव है। लेकिन पहले चरण में इसे देश के पिछड़े 2500 ब्लॉकों में लागू किया जाएगा।
इनमें इन ब्लॉकों की 10-10 ग्राम पंचायतों का चयन किया जाना है। प्रदेश में इस श्रेणी के 403 विकास खंड हैं। चयनित ग्राम पंचायतों के समस्त तकनीकी सहायकों और मनरेगा से जुड़े इंजीनियरों को मोबाइल (टैबलेट पीसी) दिया जाएगा।
ये मोबाइल ग्लोबल सिस्टम फॉर मोबाइल कम्युनिकेशन (जीएसएम) और जनरल पैकेज रेडियो सर्विसेज (जीपीआरएस) से लैस होंगी। साथ ही मनरेगा सॉफ्ट के केंद्रीय सर्वर से भी लिंक होंगे। अधिकारी ने बताया कि यह सिस्टम पारदर्शिता के लिहाज से बेहद कारगर साबित हो सकता है।