लखनऊ। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को समाप्त कर उसकी जगह लाए गए वीबी- जी राम जी कानून के विरोध में कम्युनिस्ट दलों ने प्रदर्शन किया। परिवर्तन चौक से जिलाधिकारी कार्यालय तक मार्च निकालकर नए कानून को रद्द करने की मांग की।
सीपीआई (एमएल) लिबरेशन के राज्य स्थायी समिति के सदस्य एवं जिला प्रभारी रमेश सिंह सेंगर ने कहा कि मनरेगा कोई खैरात नहीं, बल्कि ग्रामीण मेहनतकशों का कानूनी अधिकार है। भाकपा के राज्य सचिव अविंधराज स्वरूप ने कहा कि नया कानून लाना सरकार के जनविरोधी और श्रमिक विरोधी चरित्र को उजागर करता है। प्रदर्शन में सीपीआई (एम) के जिला सचिव मंडल सदस्य प्रवीन सिंह, केके चतुर्वेदी, ऑल इंडिया फारवर्ड ब्लॉक के उदय नाथ सिंह, एक्टू से मधुसूदन मगन, एपवा से सरोजनी बिष्ट, कमला गौतम, आरवाईए से राजीव गुप्ता, आईसा से शिवम सफीर, शांतम निधि, जन संस्कृति मंच से शुचित माथुर, भाकपा माले से रमेश शर्मा, रामसेवक, भाकपा के जिला सचिव परमानंद, कार्यालय सचिव मुख्तार, एसएफआई से आशीष, मंजीश आदि शामिल रहे।
प्रदर्शन करते वामदल।
प्रदर्शन करते वामदल।