कांग्रेस के जिलाध्यक्ष वीके शुक्ला ने एमएलसी दिनेश सिंह के आरोपों को झूठा करार दिया। जिलाध्यक्ष ने कहा कि दिनेश सिंह के भाई को टिकट देने के नाम पर प्रियंका ने कोई इस्तीफा नहीं लिया था। इस्तीफा विधान परिषद के सभापति को दिया जाता है। एमएलसी की सदस्यता चंद दिनों की है, इसी कारण वह हड़बड़ाए हुए हैं।
कांग्रेस जिलाध्यक्ष ने अपने बयान में कहा कि नसीमुद्दीन सिद्दीकी को बसपा ने पार्टी से निकाल दिया था, जिसकी वजह से विधान परिषद में असंबद्ध सदस्य के रूप में उन्हें मान्यता प्रदान की जा चुकी है। जबकि दिनेश सिंह को पार्टी से निकाला नहीं गया है। उन्होंने स्वयं भाजपा की सदस्यता ग्रहण की है। जिलाध्यक्ष ने कहा कि ऐसे कई उदाहरण हैं, जहां दो सदस्यों में एक सदस्य के पार्टी बदलने के कारण दल परिवर्तन के आधार पर सदस्यता समाप्त हो गई है।
जिलाध्यक्ष ने कहा कि दिनेश सिंह कांग्रेस के बडे़ नेताओं का नाम लेकर अपने पाप को छिपाने की कोशिश करना बंद करें। वे शीघ्र ही बेनकाब हो जाएंगे। दिनेश सिंह अमेठी के एमएलसी दीपक सिंह की बात कर रहे हैं। उनको यह नहीं पता कि दीपक चुनाव लड़कर एमएलसी बने हैं। इससे पहले वे तीन बार क्षेत्र पंचायत सदस्य व दो बार ब्लॉक प्रमुख भी रह चुके हैं। उनकी पत्नी भी प्रमुख रह चुकी हैं। जिलाध्यक्ष ने कहा कि दिनेश सिंह अगला जो भी चुनाव लड़ेंगे, उसमें उनकी हैसियत जिले की जनता बता देगी।