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अस्पताल इंस्पेक्शन के लिए पहुंचे विधायक, बोले- ओटी है या संक्रमण बांटने का घर

Wed, 05 Jul 2017 03:17 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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न‌िरीक्षण के दौरान नीरज बोरा
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लखनऊ के अलीगंज सीएचसी का निरीक्षण करने पहुंचे क्षेत्रीय विधायक डॉ. नीरज बोरा को कई खामियां मिलीं। अस्पताल की ओटी की हालत बदतर मिलने पर सीएचसी प्रभारी को फटकार लगाई। उन्होंने कहा कि ‘ये ओटी है या संक्रमण बांटने का घर’। बता दें क‌ि निरीक्षण की जानकारी स्टाफ को एक दिन पहले से ही थी।
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मंगलवार सुबह 8.40 बजे सीएचसी पहुंचे विधायक को लैब में पैथोलॉजिस्ट की जगह टेक्नीशियन रिपोर्ट पर साइन करते मिला। पूछताछ में पता चला कि  राजधानी के किसी भी नगरीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर पैथोलॉजिस्ट की सुविधा नहीं है। 

इस पर विधायक ने सीएमओ से कहा कि  अगर निजी अस्पताल में लैब टेक्नीशियन रिपोर्ट पर साइन करता तो आप उसे तुरंत सीज कर देते। उन्होंने सीएमओ को निर्देश दिए कि पैथोलॉजी जांच की रिपोर्ट केवल एमसीआई से पंजीकृ त डॉक्टर ही साइन करें। विधायक अस्पताल में करीब दो घंटे तक रहे। इस दौरान ओपीडी ,वार्डों, पैथोलॉजी का निरीक्षण किया। 
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विधायक ने सीएमओ डॉ. जीएस वाजपेयी से डॉक्टरों की कमी के संबंध में बात की तो पता चला कि संविदा पर भर्ती निकालने के बावजूद डॉक्टर नहीं मिल रहे हैं। इस बात पर विधायक ने सीएमओ से स्वास्थ्य मंत्री के सामने आनी मांगे रखने की बात कही। उन्होंने कहा कि चाहे इसके लिए मंत्री के पास धरना ही क्यों न देना पड़े।

ओटी में मिली धूल-मिट्टी और जाला

न‌िरीक्षण के दौरान व‌िधायक
अस्पताल के प्रथम तल पर बनी ओटी में सक्शन मशीन का पाइप गंदा था। बारह साल पुरानी ओटी बेड जर्जर मिली। ऑक्सीजन कांसेंट्रेटर नहीं था और ओटी लाइट नहीं मिली। मल्टी पैरा मॉनिटर खराब था। पूरी ओटी जाले व धूल मिट्टी की चपेट में थी।

इसपर विधायक ने प्रभारी डॉ. अनुपम कटियार को फटकार लगाते हुए कहा कि यह ओटी है या गर्भवती महिलाओं को संक्रमण बांटने का घर। इस प्रभारी ने बताया कि रोज ही ओटी की सफाई की जाती है। इसपर इस विधायक ने कहा कि वह भी डॉक्टर हैं। ओटी में कितनी साफ-सफाई है उन्हें इसकी जानकारी है। दूसरे तल पर नसबंदी के लिए बनी माइनर ओटी में भी इसी तरह के हालात मिले। 

सुबह शुरू हुई सफाई
पता चला कि सीएमओ ने मंगलवार सुबह 7:30 बजे विधायक के निरीक्षण की जानकारी दी तो अस्पताल में हलचल मच गई। इसके बाद प्रभारी ने सफाई कर्मचारियों के साथ वार्ड आया तक को सफाई में लगा दिया। आनन-फानन में टॉयलेट की धुलाई कराई गई। एंबुलेंस से लेकर परिसर में मौजूद हर चीज को साफ किया गया। 

ओपीडी छोड़ तैयारी में जुटे डॉक्टर
प्रभारी से लेकर बाल रोग विशेषज्ञ, स्टाफ नर्स ओपीडी छोड़कर अस्पताल की व्यवस्थाओं को चाक चौबंद करने में जुट गए। वहीं, मरीज डॉक्टर के इंतजार में बुखार से तपते मासूमों को लिए बैठे रहे। 
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म‌िलीं ये सब खाम‌ियां

स्टाफ से बात करते व‌िधायक
विधायक ने निरीक्षण की सूचना पहले ही दे दी थी। इसके बाद भी कई खामियां मिलीं। मंगलवार तड़के से ही ओपीडी और वार्डों में सफाई शुरू कराई गई। लैब के उपकरणों से लेकर पल्स पोलियो के लिए सुबह 8:30 बजे के बाद बोर्ड लगाए गए। इसके बाद भी कई कमियां मिलीं।  

डीपीटी वैक्सीन तक नहीं
वैक्सीन कक्ष में एसी नहीं था। जांच में पता चला कि तीन माह से अस्पताल में डिप्थीरिया, टिटनेस व परट्यूसिस (डीपीटी) वैक्सीन नहीं है। विधायक ने जब सीएमओ से पूछा तो पता चला कि पूरे जनपद में ही इसकी कमी है। इसके बाद जल्द से जल्द वैक्सीन की कमी पूरा करने के निर्देश दिए।

अर्बन सीएचसी की सुविधा दें
अस्पताल में लगे प्रसूति गृह का बोर्ड देखकर कहा कि अब यह प्रसूति गृह नहीं बल्कि अर्बन सीएचसी है। इसलिए इस बोर्ड को हटवा दीजिए। इसपर प्रभारी ने अस्पताल में विशेषज्ञों और अन्य स्टाफ की कमी बताई। 

क्या सुधरेंगे अस्पतालों के हालात?
हर सरकार में नए मंत्री व विधायक प्रभारियों को फटकार लगा कर तमाम निर्देश दे देते हैं। लेकिन जब अधिकारी स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर कराने के लिए अपनी जरूरतें बताते हैं तो मंत्री वादे कर मामला टाल जाते हैं। बड़ा सवाल यह है कि इसी तरह स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर होंगी। 
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