आरएलबी : 110 बेड, 10 मरीज भर्ती
रानी लक्ष्मीबाई संयुक्त चिकित्सालय की 110 बेड की क्षमता है। डेंगू के लिए यहां 25 बेड आरक्षित हैं, लेकिन एक मरीज ही भर्ती है। सीएमएस डॉ. संगीता टंडन ने बताया कि अस्पताल में कुल 10 मरीज भती हैं।
ठाकुरगंज अस्पताल : 240 बेड, 64 मरीज भर्ती
ठाकुरगंज संयुक्त चिकित्सालय की 240 बेड की क्षमता है, लेकिन यहां 165 बेड पर ही भर्ती हो रही है। अभी डेंगू के नौ मरीज भर्ती हैं। सीएमएस डॉ. आनंद बोध के मुताबिक पूरे अस्पताल में कुल 64 मरीज भर्ती हैं। यहां अभी काफी बेड खाली हैं।
बीआरडी : 100 बेड, 25 मरीज भर्ती
बीआरडी महानगर 100 बेड का अस्पताल है। 70 बेडों पर भर्ती की जा रही है। अस्पताल में छह बेड पर डेंगू के मरीजों सहित कुल 25 मरीज भर्ती है।
रामसागर : 100 बेड, 56 मरीज भर्ती
बीकेटी स्थित रामसागर संयुक्त चिकित्सालय में 100 बेड हैं। यहां डेंगू वार्ड में छह और पूरे अस्पताल में 56 मरीज हैं। यहां पर इलाज कराने के बजाय मरीज बलरामपुर व सिविल आ रहे हैं।
जरूरत पड़ी तो करेंगे शिफ्ट
सीएमओ डॉ. मनोज अग्रवाल का कहना है कि यह मरीज का अधिकार है कि वह किस अस्पताल में इलाज कराना चाहता है। इसके लिए मरीज को बाध्य नहीं कर सकते हैं। मरीज बड़े अस्पतालों को पहले तरजीह देते हैं। यही वजह है कि वहां पर मरीजों की भीड़ अधिक है। यदि बड़े अस्पताल पर दबाव ज्यादा बढ़ेगा तो उनको अन्य अस्पताल में शिफ्ट किया जाएगा।
बलरामपुर अस्पताल के सीएमएस डॉ. जीपी गुप्ता का कहना है कि बड़े अस्पतालों में बेहतर सुविधाएं व संसाधन मौजूद हैं। मरीजों के गंभीर होने पर आईसीयू की भी सुविधा है। यही वजह है कि मरीज छोटे अस्पतालों के बजाय बड़े अस्पताल अधिक आ रहे हैं।
सिविल अस्पताल के सीएमएस डॉ. आरपी सिंह का कहना है कि वीआईपी अस्पतालों में इसकी गिनती होती है। यहां पर कई विधा के कुशल विशेषज्ञ तैनात हैं। यही वजह है बेहतर इलाज के लिए मरीज यहां पर ही रुख करते हैं। इससे मरीजों का लोड बढ़ता है।