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बदइंतजामी: डेंगू के मरीजों से बड़े अस्पतालों में भीड़, छोटे खाली पड़े, नहीं कर पा रहे प्रबंधन

Mon, 14 Nov 2022 03:05 PM IST
ishwar ashish हिमांशु अवस्थी, अमर उजाला, लखनऊ

सार

लखनऊ के अस्पतालों में डेंगू मरीजों की भीड़ लगी है। बदइंतजामी का हाल ये है कि कंट्रोल रूम बनाया गया है फिर भी मरीजों का प्रबंधन नहीं हो पा रहा है।
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बीआरडी अस्पताल में खाली पड़े बेड। - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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लखनऊ शहर में डेंगू और बुखार के मरीजों की वजह से बड़े सरकारी अस्पतालों में भीड़ है। उधर, कई अस्पताल ऐसे भी हैं जो खाली पड़े हैं। स्वास्थ्य विभाग ने डेंगू के लिए कंट्रोल रूम तो बना रखा है, लेकिन मरीजों का प्रबंधन न होने से सिविल, बलरामपुर और लोकबंधु जैसे अस्पतालों में मारामारी है।

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उधर, रानी लक्ष्मीबाई और बीआरडी महानगर जैसे अस्पतालों में 90 फीसदी बेड खाली पड़े हैं। लोगों को इन अस्पतालों में बेड खाली होने की जानकारी नहीं है और स्वास्थ्य विभाग भी मरीजों को यहां पहुंचाने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहा है। जबकि कम गंभीर मरीजों को इन अस्पतालों में शिफ्ट कर बड़े अस्पतालों का लोड कम किया जा सकता है। इसके साथ जरूरी सर्जरी व अन्य मरीजों का इलाज भी बेहतर तरीके से किया जा सकता है।

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लखनऊ में कोरोना संक्रमण के बाद एक बार फिर से मरीजों की संख्या काफी ज्यादा बढ़ी हुई है। मरीजों का दबाव सिर्फ एक ही अस्पताल पर न पड़े इसके लिए स्वास्थ्य विभाग ने जिला प्रशासन के निर्देश पर कोरोना संक्रमण के दौरान ऑनलाइन पोर्टल बनाया था। इसमें हर अस्पताल में उपलब्ध बेड मरीज देख सकता था।

विभाग ने इन अस्पतालों को उनकी क्षमता के हिसाब से अलग-अलग लेवल में बांट रखा था। इसी वजह से कोविड प्रबंधन संभव हो पाया था। मौजूदा समय में डेंगू और बुखार की वजह से हालात बिगड़े हुए हैं, लेकिन न तो पोर्टल नजर आ रहा है और न ही मरीज भर्ती करने के लिए केंद्रीकृत व्यवस्था है। इससे किसी अस्पताल में मारामारी है तो कोई खाली पड़ा है। 

इन अस्पतालों पर दबाव
बलरामपुर : 750 बेड, 645 मरीज भर्ती
बलरामपुर 756 बेड का अस्पताल है। यहां बने डेंगू वार्ड में 18 मरीज भर्ती हैं। पूरे अस्पताल में 645 मरीज भर्ती हैं। यहां सिर्फ वही बेड खाली हैं जो दूसरे विभागों से संबंधित हैं। मरीजों का लोड अधिक होने से इमरजेंसी ओपीडी में बेड बढ़ाने पड़े हैं। सीएमएस डॉ. जीपी गुप्ता के मुताबिक, अस्पताल में करीब एक माह से मरीजों का दबाव है।

सिविल : 400 बेड, 270 मरीज भर्ती
सिविल अस्पताल में बीते माह मरीजों का लोड बढ़ने पर रूटीन सर्जरी रोक दी गई थी। अस्पताल में करीब 400 बेड हैं। यहां डेंगू के चार मरीज भर्ती हैं। पूरे अस्पताल में 270 मरीज भर्ती हैं। सीएमएस डॉ. आरपी सिंह ने बताया कि पहले से मरीजों का लोड कुछ कम हुआ है।

लोकबंधु : 300 बेड, 220 मरीज भर्ती
लोकबंधु 300 बेड का अस्पताल है। यहां वर्तमान में 200 मरीज भर्ती है। यहां भी कई दिनों से मरीजों का दबाव है।

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इन अस्पतालों में ज्यादातर बेड खाली हैं

आरएलबी : 110 बेड, 10 मरीज भर्ती
रानी लक्ष्मीबाई संयुक्त चिकित्सालय की 110 बेड की क्षमता है। डेंगू के लिए यहां 25 बेड आरक्षित हैं, लेकिन एक मरीज ही भर्ती है। सीएमएस डॉ. संगीता टंडन ने बताया कि अस्पताल में कुल 10 मरीज भती हैं।  

ठाकुरगंज अस्पताल : 240 बेड, 64 मरीज भर्ती
ठाकुरगंज संयुक्त चिकित्सालय की 240 बेड की क्षमता है, लेकिन यहां 165 बेड पर ही भर्ती हो रही है। अभी डेंगू के नौ मरीज भर्ती हैं। सीएमएस डॉ. आनंद बोध के मुताबिक पूरे अस्पताल में कुल 64 मरीज भर्ती हैं। यहां अभी काफी बेड खाली हैं।

बीआरडी : 100 बेड, 25 मरीज भर्ती
बीआरडी महानगर 100 बेड का अस्पताल है। 70 बेडों पर भर्ती की जा रही है। अस्पताल में छह बेड पर डेंगू के मरीजों सहित कुल 25 मरीज भर्ती है।

रामसागर : 100 बेड, 56 मरीज भर्ती
बीकेटी स्थित रामसागर संयुक्त चिकित्सालय में 100 बेड हैं। यहां डेंगू वार्ड में छह और पूरे अस्पताल में 56 मरीज हैं। यहां पर इलाज कराने के बजाय मरीज बलरामपुर व सिविल आ रहे हैं। 

जरूरत पड़ी तो करेंगे शिफ्ट  
सीएमओ डॉ. मनोज अग्रवाल का कहना है कि यह मरीज का अधिकार है कि वह किस अस्पताल में इलाज कराना चाहता है। इसके लिए मरीज को बाध्य नहीं कर सकते हैं। मरीज बड़े अस्पतालों को पहले तरजीह देते हैं। यही वजह है कि वहां पर मरीजों की भीड़ अधिक है। यदि बड़े अस्पताल पर दबाव ज्यादा बढ़ेगा तो उनको अन्य अस्पताल में शिफ्ट किया जाएगा। 

बलरामपुर अस्पताल के सीएमएस डॉ. जीपी गुप्ता का कहना है कि बड़े अस्पतालों में बेहतर सुविधाएं व संसाधन मौजूद हैं। मरीजों के गंभीर होने पर आईसीयू की भी सुविधा है। यही वजह है कि मरीज छोटे अस्पतालों के बजाय बड़े अस्पताल अधिक आ रहे हैं।

सिविल अस्पताल के सीएमएस डॉ. आरपी सिंह का कहना है कि वीआईपी अस्पतालों में इसकी गिनती होती है। यहां पर कई विधा के कुशल विशेषज्ञ तैनात हैं। यही वजह है बेहतर इलाज के लिए मरीज यहां पर ही रुख करते हैं। इससे मरीजों का लोड बढ़ता है।
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