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सीएम योगी से मिलने के बाद डीएम के खिलाफ हुए मंत्री ओपी राजभर का धरना कैंसिल

Mon, 03 Jul 2017 03:25 PM IST
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ
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मंत्री ओमप्रकाश राजभर - फोटो : demo pic
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गाजीपुर के डीएम संजय कुमार खत्री से नाराज दिव्यांग एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री ओमप्रकाश राजभर की नाराजगी मुख्यमंत्री आद‌ित्यनाथ से म‌िलने के बाद दूर हो गई।  वह सोमवार को सीएम से म‌िलने लखनऊ आए थे। राजभर ने बताया था क‌ि डीएम के खिलाफ 4 जुलाई को गाजीपुर के डीएम दफ्तर पर भारतीय समाज पार्टी के कार्यकर्ताओं के साथ धरना देंगे, ये धरना अब कैंस‌िल हो गया है। राजभर की सीएम से करीब 35 म‌िनट तक मुलाकात चली। उन्होंने बताया,  मुलाकात में उन्होंने 19 बातें रखी थीं, ज‌िसमें से 17 बातें मान ली गई हैं। सीएम ने डीएम को हटाने का भी आश्वसन द‌िया है।
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लखनऊ स्थित आवास पर रविवार को मीडिया से बातचीत में राजभर ने कहा था कि उन्होंने 25 जून को भाजपा के प्रदेश संगठन मंत्री सुनील बंसल को और 27 जून को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को डीएम के कारनामों की जानकारी दे दी थी।

इसके बावजूद डीएम को नहीं हटाया जा रहा है। उन्होंने कहा बताया था कि सीएम ने उन्हें सोमवार को बुलाया है। मुलाकात के दौरान वह डीएम के 19 कारनामों की सीडी सीएम को सौंपेंगे। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष से संपर्क कर उन्हें भी पूरे प्रकरण की जानकारी देंगे।
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राजभर ने बताया था कि गाजीपुर की 70 प्रतिशत जनता डीएम के व्यवहार से नाराज है। उन्होंने कहा, पिछले 15 साल में मैं दलित, पिछड़ों और कमजोर लोगों के हक की लड़ाई लड़ता रहा हूं और उन्हीं लोगों की बदौलत विधायक भी बना हूं।

बसपा के वोट बैंक माने जाने वाले समाज के दबे-कुचले लोगों ने भी इस बार भाजपा गठबंधन को वोट देकर सरकार बनवाई है। लोगों को उम्मीद थी कि सरकार बदलेगी तो उनकी समस्याएं भी दूर होंगी, लेकिन अब अपनी सरकार में ही अधिकारी मेरी बात नहीं सुन रहे हैं।
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बोले, सीएम से भी बड़ा विभाग है मेरे पास

मंत्री ओमप्रकाश राजभर - फोटो : demo pic
राजभर ने बताया था क‌ि डीएम के खिलाफ 4 जुलाई को गाजीपुर के डीएम दफ्तर पर भारतीय समाज पार्टी के कार्यकर्ताओं के साथ धरना देंगे, ये धरना अब कैंस‌िल हो गया है।

उन्होंने कैब‌िनेट की बैठक में भी ह‌िस्सा न लेने की बात कही थी। ये पूछे जाने पर कि कम महत्वपूर्ण विभाग का मिलना तो उनकी नाराजगी की वजह नहीं है? राजभर ने कहा, मेरे पास तो सीएम से भी बड़ा विभाग है।

प्रदेश की 22 करोड़ जनता में दिव्यांगों की संख्या करीब 2 करोड़ है और पिछड़ी जाति की 54 प्रतिशत आबादी है। इनके कल्याण की जिम्मेदारी मुझे सौंपी गई है। इसलिए विभाग को लेकर नाराजगी की चर्चा बेबुनियाद है। 

अपनी ही सरकार के खिलाफ बगावती सुर बुलंद करते हुए ओमप्रकाश राजभर ने कहा कि मैं भी गठबंधन सरकार का एक जिम्मेदार मंत्री हूं। इसके बावजूद मेरे ही गृहजिले में ऐसी बेकद्री है तो अन्य जिलों में कार्यकर्ताओं के काम कैसे होते होंगे।

राजभर ने बताया था कि मुख्यमंत्री को उन्होंने पूरी बात बताई थी, लेकिन उन्होंने गाजीपुर के प्रभारी मंत्री बृजेश पाठक से मिलने के लिए कह दिया। पाठक से भी मिलकर अपनी समस्या बताई, लेकिन अभी तक कुछ भी नहीं हुआ। 
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सिन्हा से सियासी प्रतिद्वंद्विता भी है झगड़े की जड़

मंत्री ओमप्रकाश राजभर - फोटो : demo pic
इस मामले में बृजेश पाठक का कहना है जब मैं पिछले दिनों गाजीपुर गया था तो वहां के भाजपा जिलाध्यक्ष ने पूरे प्रकरण की जानकारी दी थी। इस पर मैंने खुद ओमप्रकाश राजभर से बात की थी।

आज भी मेरी उनसे बात हुई है। मुझे पूरी उम्मीद है कि मामले को सलटा लिया जाएगा। राजभर ने मीडिया से कहा, डीएम को कहीं न कहीं से राजनीतिक संरक्षण मिला हुआ है।

इसीलिए वह जानबूझ कर मेरी प्रतिष्ठा के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। हालांकि सूत्रों का कहना है कि राजभर की परेशानी का कारण सिर्फ डीएम ही नहीं हैं, बल्कि गाजीपुर से सांसद और केंद्रीय मंत्री मनोज सिन्हा की अधिकारियों पर अच्छी पकड़ भी है।

दोनों की राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता भी जगजाहिर है। एक स्थानीय नेता ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि मनोज सिन्हा शुरू से ही भासपा से गठबंधन के खिलाफ  थे।

उनकी इच्छा थी कि भाजपा ही पार्टी के ही राजभर नेताओं को आगे बढ़ाए। माना जा रहा है कि राजभर की इस पीड़ा के पीछे मनोज सिन्हा का जिले में बढ़ता सियासी कद है। डीएम तो बस मोहरा बनाए जा रहे हैं। 
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