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यहां ट्वायलेट में सिर्फ स्टाफर्स की एंट्री!

Fri, 03 Jan 2014 03:58 PM IST
अतुल भारद्वाज/ अमर उजाला, लखनऊ
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यह ट्वायलेट पर ताला क्यों पड़ा है? जबाव मिला, स्थाई स्टाफ ही केवल इसका उपयोग करता है।
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रिमोट सेंसिंग एप्लीकेशन सेंटर में ट्वायलेट के उपयोग में भेदभाव पर बिफरे नवागत अध्यक्ष डॉ. कुलदीप उज्ज्वल ने प्रशासनिक अधिकारी को ही बदल दिया।

रिमोट सेंसिंग एप्लीकेशन सेंटर के अध्यक्ष डॉ. उज्ज्वल ने केंद्र का निरीक्षण किया था। यहां उन्होंने स्थाई और अस्थाई स्टाफ के लिए अलग-अलग ट्वायलेट देखे तो वह बिफर पड़े।

उन्होंने बताया कि संस्थान में स्थाई और संविदा के स्टाफ में भेदभाव समझ से परे है। आखिर संस्थान के अधिकारी किस युग में जी रहे हैं।

जो स्टाफ उनके साथ समान काम कर रहा है। वह स्थाई स्टाफ का ट्वायलेट उपयोग नहीं कर सकता। यह पूरी तरह गलत बात है।

इसके लिए प्रशासनिक अधिकारी ही पूरी तरह जिम्मेदार हैं। टॉयलेट के उपयोग में भेदभाव के साथ ही संस्थान में गंदगी का आलम भी था।

कार्यकारिणी की बैठक में भी कुछ शिकायतें मिलीं। इसके चलते यह कार्रवाई की गई।

इस पद पर रहे डॉ. एके तांगडी वरिष्ठ वैज्ञानिक हैं। उन्हें वैज्ञानिक शोध में गहन अनुभव है। ऐसे में अब डॉ. उज्ज्वल ने उन्हें रिसर्च वर्क में अपना सहयोग देने के लिए कहा है।
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गौरतलब है कि यह संस्थान पहले मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के अधीन था। हाल ही में डॉ. उज्ज्वल को इसका अध्यक्ष बनाया गया है।

डॉ. एमएस यादव बने प्रशासनिक अधिकारी
निदेशक डॉ. पीएन शाह के मुताबिक, वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. एमएस यादव को केंद्र का प्रशासनिक अधिकारी नियुक्त किया गया है। केंद्र के सुचारु रूप से संचालन के लिए यह जिम्मेदारी उन्हें दी गई है। इससे पहले डॉ. यादव भूमि सुधार निगम में परियोजना प्रबंधक के पद पर कार्य कर चुके हैं।

अमेरिका में जीआईएस का प्रशिक्षण प्राप्त वैज्ञानिक को प्रशासनिक कार्यों का अनुभव है।
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