सोनभद्र में चार पत्थर की खदानों पर अवैध खनन मिलने पर भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग ने चार खनन पट्टाधारकों के खिलाफ जुर्माना लगाया है। जुर्माना राशि जमा कराने पर उनके खनन क्षेत्र में खनन कार्य प्रतिबंधित किया है। दो खनन पट्टा निरस्त भी किए हैं।
विभाग की निदेशक डॉ. रोशन जैकब ने बताया कि निदेशालय की टीम ने 12 जुलाई को सोनभद्र में पत्थर की खदानों की जांच की थी। जांच में पाया गया था कि चार पट्टाधारकों ने पट्टा क्षेत्र से बाहर अवैध खनन किया है। बाबा इंडस्ट्रीज , गणेशाय इंटरप्राइजेज , सांई राम इंटरप्राइजेज और श्री सुरेश चन्द्र गिरी के खिलाफ जुर्माना की कार्रवाई की गई है। उन्होंने बताया कि सांईराम इंटरप्राइजेज के खनन पट्टा क्षेत्र में 10,000 घन मीटर प्रति हेक्टेयर खनन स्वीकृत है। सोनभद्र में सामान्य रूप से उपलब्ध खनन योग्य मात्रा से अत्यधिक कम है। इससे एक ओर शासन को राजस्व की हानि हो रही है। वहीं इस क्षेत्र में बड़े स्तर पर अवैध खनन की संभावना है। विभाग की निदेशक डॉ. रोशन जैकब ने सोनभद्र के जिला अधिकारी ऐसे समस्त पट्टा क्षेत्रों को चिन्हित कर उन्हें निरस्त करने के निर्देश दिए हैं। क्षेत्र में उपलब्ध मात्रा का पुनः निर्धारण करते हुए विज्ञापन की कार्यवाही शुरू करने के निर्देश दिए हैं।
उन्होंने बताया कि सुरेश चंद्र गिरी के खनन पट्टा क्षेत्र में खान सुरक्षा महानिदेशालय की ओर से सुधारात्मक कार्य के लिए खनन कार्य प्रतिबंधित किया है। इसके बाद भी पट्टाधारक की ओर से अवैध खनन किया जा रहा है। सोनभद्र के जिलाधिकारी को इस पट्टे को तत्काल निरस्त कर क्षेत्र में उपलब्ध मात्रा का पुनः निर्धारण कराकर विज्ञापन की कार्यवाही करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने समस्त खनन पट्टा क्षेत्रों की एक नियमित अंतराल पर जांच कराने और जांच में जिला खनिज न्यास निधि के माध्यम से ड्रोन का उपयोग करने के निर्देश दिए हैं। जांच में यदि किसी भी पट्टाधारक की ओर से अवैध खनन पाया जाए तो उनका पट्टा निरस्त करने की कार्यवाही की जाएगी।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2017 से 2021 तक विभिन्न खनन क्षेत्रों में जारी सहमति पत्र पर पर्यावरण स्वच्छता प्रमाण पत्र अभी तक लंबित है। चैम्पियन ग्रुप आफ काम्पलेक्स वर्ष का वर्ष 2018 से और महाकाल इंटरप्राइजेज का वर्ष 2021 से पर्यावरण की एनओसी लंबित है। विभाग का मानना है कि एनओसी को लंबित रखने में प्रस्तावक की भूमिका है। उन्होंने बताया कि इन दोनो पट्टा क्षेत्रों के लिए जारी सहमति पत्र को निरस्त करने के निर्देश दिए हैं।
उन्होंने बताया कि जिन पट्टों में अभ्यर्पण प्रार्थना पत्र दिया गया है। लेकिन जिला स्तर से निर्णय नहीं लेने के कारण मामला लंबे समय से लंबित है। इससे वहां अवैध खनन की संभावना बनी हुई है। ऐसे प्रार्थना पत्रों का तत्काल निरस्त कर पुनः विज्ञप्ति जारी करने के निर्देश दिए हैं।