राज्य सरकार मिड-डे मील योजना में नया प्रयोग करने जा रही है। इसके तहत पांचवीं कक्षा तक के बच्चों को खाने के स्थान पर 150 से 200 मिलीलीटर तक दूध दिया जाएगा। इसकी खरीद सीधे दूधियों से की जाएगी और रसोइये इसे गरम करके बच्चों को देंगे।
पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर इसे सोनभद्र व मिर्जापुर जिले में लागू किया जाएगा। इन दोनों जिलों में यदि प्रयोग सफल रहा तो अन्य जिलों में इसे लागू किया जाएगा।
मिड-डे मील योजना में कक्षा आठ तक के बच्चों को खाना देने की व्यवस्था है। मध्याह्न भोजन प्राधिकरण ने इसके लिए अलग-अलग मेन्यू तय कर रखा है। शहरी क्षेत्रों में स्वयंसेवी संस्थाओं और ग्रामीण क्षेत्रों में रसोइयों से इसे बनवाकर दिया जा रहा है, पर खाने में आए दिन कुछ न कुछ खामियां मिलती रहती हैं। इसलिए इसके विकल्प के रूप में दूध देने पर विचार चल रहा है।