लखनऊ से लोकसभा के 1954, 1957 और 1962 का चुनाव हारने के बाद वह 1991 तक यहां से चुनाव नहीं लड़े। पर, लखनऊ बराबर आते-जाते रहे। वह 1991 में जब लोकसभा चुनाव के यहां से उम्मीदवार हुए तो बोले, ‘आप लोगों ने क्या सोचा था, मुझसे पीछा छूट जाएगा तो यह होने वाला नहीं। मेरो मन अनत कहां सुख पावे, लखनऊ मेरा घर है। इतनी आसानी से मुझसे रिश्ता नहीं तोड़ सकते। मेरा नाम भी अटल है। देखता हूं कि कब तक मुझे सांसद नहीं बनाओगे।’ अटल सांसद चुन लिए गए।
लोकसभा में विपक्ष का नेता होने के नाते व्यस्तता के बावजूद वह लखनऊ में एक सांसद के रूप में काफी सक्रिय रहे। लखनऊ ने उन्हें पांच बार सांसद चुना। तमाम उतार-चढ़ाव आए लेकिन लखनऊ वालों का अटल से और अटल का लखनऊ वालों से रिश्ता कायम रहा।
बड़े राजनेता होने के बावजूद बतौर सांसद वह अपने क्षेत्र के सरोकारों को लेकर कितने सक्रिय और सचेत थे, इसका पता उनके बतौर सांसद यहां शुरू कराए गए कामों से मिलता है। पहले उन्होंने सांसद के तौर पर यहां प्रयोग किया और फिर सफल रहने पर उसे देश भर में लागू किया। पूर्व नगर विकास मंत्री लाल जी टंडन बताते हैं, ‘एक दिन अटल जी और हम बैठे थे। उन्होंने कहा, ‘देखता हूं कि यहां मध्यम और गरीब तबके के लोगों के लिए कोई ऐसी जगह नहीं सुलभ है जहां पर वह अपने बेटे-बेटी का विवाह संस्कार कर सकें।’
इसी के बाद लखनऊ में सामुदायिक केंद्र बनाने का काम शुरू हुआ। इसके बाद कल्याण मंडप की कल्पना बनी। सामुदायिक केंद्र गरीबों का आज भी बड़ा सहारा हैं जहां पर उन्हें बरतन तक मिलते हैं। कल्याण मंडपों की लोकप्रियता भी किसी से छिपी नहीं है।’
कहा जाए कि गरीबों के लिए रैन बसेरा, बड़े बौद्धिक जुटानों के लिए साइंटिफिक कन्वेंशन सेंटर, लखनऊ की सड़कों का चौड़ीकरण, संसदीय क्षेत्र में आने वाले विधानसभा के महोना क्षेत्र के गांवों को जोड़ने के लिए रास्तों का निर्माण, अस्पतालों में रोगियों के तीमारदारों के लिए रहने को बसेरों का निर्माण, गरीबों के लिए पांच, दस और पंद्रह रुपये रोज पर मकान जैसे प्रयोगों ने आगे चलकर गरीबों के लिए वाल्मीकि-आंबेडकर आवास योजना, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, गांवों तक सामुदायिक केंद्रों का निर्माण, देश में अच्छी और चौड़ी सड़कों के निर्माण जैसी योजनाओं को जन्म दिया जाए तो अतिश्योक्ति न होगी। मध्यम दर्जे के लिए सस्ते ब्याज पर ऋण और वाहनों के लिए सरलता से ऋण तो किसानों के लिए किसान क्रैडिट कार्ड जैसी क्रांतिकारी योजनाओं ने लोगों का जीवन बदल दिया, इसे स्वीकार करने में शायद ही कोई परहेज करे।