राजधानी लखनऊ में सोमवार को बिजली निजीकरण के मुद्दे पर पॉवर कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष डॉ. आशीष कुमार गोयल और विद्युत कर्मचारी संघर्ष समिति के प्रतिनिधिमंडल के बीच हुई वार्ता बेनतीजा रही। इस मसले पर दोनों ने अलग-अलग तर्क दिए। ऐसे में अब बिजलीकर्मियों का आंदोलन आगे बढ़ना तय माना जा रहा है। 14 मई को समिति पदाधिकारी बैठक कर आगे की रणनीति का एलान करेंगे।
पदाधिकारियों ने बताया कि विद्युत उत्पादन निगम से वितरण निगमों को 4.17 रुपये और सेंट्रल सेक्टर से औसतन 4.78 रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली मिलती है। निजी घरानों से 5.45 रुपये प्रति यूनिट की दर से तथा शॉर्ट टर्म पॉवर परचेज से 7.31 रुपये प्रति यूनिट बिजली खरीदी जा रही है। अन्य माध्यमों से 14.204 रुपये तक प्रति यूनिट की खरीद होती है।
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बैठक के बाद पॉवर कॉर्पोरेशन एक बयान जारी किया। इसमें बताया गया कि ऊर्जा की आपूर्ति और प्राप्त होने वाले राजस्व में गैप लगातार बढ़ रहा है। वर्ष 2020-21 में 8000 करोड़ की सब्सिडी एंड लांस फंडिंग की गई, जो वर्ष 2024-25 में बढ़कर 46000 करोड़ से अधिक हो गई। वर्ष 2026-27 में यह बढ़कर 60 हजार करोड़ से अधिक होने का अनुमान है।