तीन तलाक पर पाबंदी लगाने के लिए मोदी सरकार द्वारा तैयार किए गए विधेयक को ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने सिरे से खारिज कर दिया है। बोर्ड ने इसे शरीयत कानून में सरकार की दखलंदाजी बताते हुए संविधान के मूल्यों के खिलाफ करार दिया है।
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बोर्ड का मानना है कि शादीशुदा मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों की हिफाजत के नाम पर पेश हो रहे बिल से खुद महिलाओं का नुकसान ज्यादा है। इससे परिवार बिखर जाएंगे। बोर्ड अध्यक्ष मौलाना सैयद राबे हसनी नदवी बोर्ड की मंशा से पीएम नरेंद्र मोदी को अवगत कराएंगे।
रविवार को लखनऊ के नदवा कॉलेज में ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के पदाधिकारियों की हुई बैठक हुई। जिसमें लोकसभा में पेश होने वाले इस बिल के खिलाफ जनता के साथ ही विपक्ष को भी तैयार करने पर सहमति बनाने का निर्णय लिया गया।
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बैठक में मुस्लिम नेताओं ने केंद्र सरकार की ओर से तलाक जैसे सिविल एक्ट को क्रिमिनल एक्ट मे तब्दील किये जाने पर नाराजगी जताई गई। बोर्ड ने माना कि यह मुस्लिम शरीयत कानून में सीधी दखलंदाजी है।
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बैठक के बाद बोर्ड के प्रवक्ता मौलाना खलीलुर्रहमान सज्जाद नोमानी ने कहा कि शादीशुदा मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों की हिफाजत के नाम पर लोकसभा मे पेश किया जा रहा बिल मुस्लिम महिलाओं के खिलाफ है। इस बिल के कानून मे तब्दील होने से महिलाओं को कोई फायदा तो नही होने वाला है, बल्कि नुकसान जरूर होगा। उन्होंने बिल को संविधान में मिले मजहबी अधिकार के खिलाफ बताते हुए कहा कि इस बिल की दफा 4,5,6,7 देश मे पहले से मौजूद कानून गार्डियन एंड वार्ड्स एक्ट से टकराती है। साथ ही संविधान की धारा 14 व 15 के भी खिलाफ है।
लोकसभा में सरकार पेश न करे बिल
- फोटो : amar ujala
बोर्ड के प्रवक्ता ने कहा कि केंद्र सरकार इस बिल को लोकसभा में पेश न करे। इससे परिवार जुड़ने के बजाए बिखर जाएंगे। अगर बिल को पेश करना जरूरी है तो मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों पर संजीदा से काम करने वाले महिला संगठनों और मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड से राय लेकर इसमें सुधार कर इसे पास किया जाए।
जनता के साथ ही विपक्ष को किया जाएगा जागरूक
बोर्ड सचिव मौलाना उम्मेद महफूज रहमानी ने कहा कि बिल के कई बिंदु आपस में टकरा रहे हैं। तीन तलाक से पीड़ित महिलाओं और अन्य महिलाओं में भेदभाव किया गया है। जिस कौम के अधिकारों के नाम पर बिल बनाया गया उसको तैयार करने में उसी से कोई राय नही ली गई। साफ है कि सरकार की मंशा साफ नही है। लोकतांत्रिक सरकार से हमें उम्मीद है कि पूरा इंसाफ करेगी। बिल के संबंध में लोगों को जागरूक किया जाएगा। विपक्षी राजनीतिक दलों से भी बात की जाएगी।
बैठक मे बोर्ड के चेयरमैन मौलाना सैयद राबे हसनी नदवी, महासचिव मौलाना वली रहमानी, प्रवक्ता मौलाना खलीलुर्रहमान सज्जाद नोमानी, सचिव जफरयाब जिलानी, मौलाना फजलुर्रहीम मुजददिदी, मौलाना खालिद सैफुल्लाह रहमानी, असदुद्दीन ओवैसी, मौलाना सलमान नदवी के अलावा बोर्ड की महिला विंग की संयोजक डॉ. अस्मा जहरा, ममदूहा माजिद मौजूद रहे।
वहीं, ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की बैठक के बाद यूपी के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने कहा है कि इसका कितना भी विरोध हो लेकिन सरकार इस मसले पर पीछे हटने वाली नहीं है। मुस्लिम महिलाओं ने तीन तलाक के खिलाफ भाजपा को समर्थन दिया है। हम मुस्लिम महिलाओं पर होने वाले अत्याचारों के खिलाफ मजबूती से खड़े हैं और खड़े रहेंगे।
भाजपा एंटी मुस्लिम- एंटी इस्लामिक
मामले पर मुस्लिम धर्मगुरू साजिद रशीदी ने भाजपा पर तीन तलाक के जरिए 2019 के लोकसभा चुनाव में लाभ लेने की कोशिश करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि ये मजहबी मामला है सरकार को इस पर मुस्लिम संगठनों से बात करनी चाहिए थी लेकिन ऐसा नहीं किया गया। जो कि दिखाता है कि इसके पीछे उनकी मंशा ठीक नहीं है। भाजपा एंटी मुस्लिम- एंटी इस्लामिक है।
मौलाना राबे हसन नदवी की अध्यक्षता में हुई बैठक में हैदराबाद के सांसद व ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी व बोर्ड के कार्यकारी सदस्य ईदगाह इमाम मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली भी मौजूद थे।