- बाबरनामा में मीर बाकी की कई नामों से चर्चा की गई है। उसे मीर ताशकंदी, बाकी शाघावाल, बाकी बेग और बाकी मिंगबाशी नामों से उसकी चर्चा मिलती है। लेकिन बाबरनामा में कहीं उसके लिए मीर नाम का प्रयोग नहीं किया गया है। माना जाता है कि फ्रांसिस बुकानन ने 1813-14 में बाकी के नाम के आगे मीर लगाया।
- मस्जिद के शिलालेखों के अनुसार बाबर के आदेश पर मीर बाकी ने 1528-29 में इसका निर्माण कराया था। बाकी ने मस्जिद बनाने के लिए रामकोट यानी राम के किले को चुना था। कहा जाता है कि मस्जिद बनाने के लिए उसने यहां पहले से मौजूद भगवान राम के मंदिर को तोड़ दिया था। हालांकि, मुस्लिम पक्षकार यहां मंदिर के होने से इंकार करते हैं, लेकिन 19वीं सदी की शुरुआत के साथ ही यह हिंदू-मुसलमानों के बीच बड़े विवाद के कारण के रूप में तब्दील होने लगा।