टीबी,एचआईवी और मलेरिया की दवाइयां फिलहाल सस्ती दरों पर मिलती रहेंगी। केंद्रीय सीमा शुल्क एवं उत्पाद कर बोर्ड (सीबीईसी) ने इन दवाओं को उत्पाद शुल्क में सौ फीसदी छूट की अवधि 31 मार्च 2016 तक बढ़ा दी है।
गौरतलब है कि वर्ष 2013 में बोर्ड ने एक अधिसूचना जारी करके एचआईवी,मलेरिया और टीबी की दवाएं और इनके परीक्षण में इस्तेमाल की जाने वाली मेडिकल किट को उत्पाद शुल्क से पूरी तरह मुक्त कर दिया था।
इसकी मुख्य वजह इन दवाओं को सस्ता करना था। अधिसूचना में इस छूट की मियाद 30 सितंबर 2015 तक रखी गई थी। इस सुविधा को पाने के लिए यह शर्त भी थी कि उत्पादक संबंधित डिप्टी कमिश्नर को यह घोषणा पत्र देंगे कि इन दवाओं का इस्तेमाल विश्व बैंक की ओर से प्रायोजित योजनाओं में ही होगा।
इधर छूट समाप्ति की समय सीमा नजदीक आती देख उत्पादकों में इसके आगे बढ़ने या न बढ़ने को लेकर संशय था। हालांकि करीब डेढ़ माह पहले ही बोर्ड ने छूट की सीमा बढ़ाने संबंधी अधिसूचना जारी कर दी है।
ये हैं दवाइयां
आइसोनिएजिड, इथेमबुटोल, कैनेमाइसिन, केप्रिओमाइसिन, लीवोफ्लॉक्स, मॉक्सिफ्लॉक्सेसिन, साइक्लोसिरिन, इथिओनेमाइड, इथेम्बुलॉल, प्यराजिनेमाइड, पिरीडॉक्सिन, क्लोफेजिमाइन, लिनेजोलिड, एमॉक्सिक्लेव, सोडियम (पीएएस), क्लेरिथ्रोमाइसिन, थियासिटाजोन, रिफेम्पिसिन, रिफेब्यूटिन, स्ट्रेप्टोमाइसिन (इंजेक्शन)।
जांच के उपकरण
बायोसेफ्टी कैबिनेट क्लास-2 (ए-2), बैक्टीरियोलॉजी इनक्यूबेटर, रेफ्रिजरेटर सेंट्रिफ्यूज, ऑटोक्लेव्स (हॉरिजोंटल, वर्टिकल), एलपीए इक्विपमेंट्स, एलसी इक्विपमेंट्स, एलपीए किट्स, लिक्विड कल्चर रिएजेंट्स, कैपिल्ला किट्स, फ्यूलेरेंस माइक्रोस्कोप, डीएनए सीक्वेसिंग किट्स, इंसपिरेटर्स, कार्टेजेस, एनुअल कैलिब्रेशन।
बीती 30 जुलाई को जारी आदेश की प्रति उत्पाद शुल्क मुख्यालयों में आ चुकी है। इन बीमारियों की गंभीरता एवं इसमें इस्तेमाल होने वाली दवाइयों की महत्ता को देखते हुए बोर्ड ने यह फैसला किया है। इससे आम लोगों को बड़ी राहत मिलेगी।
सीए धर्मेंद्र श्रीवास्तव, सलाहकार, उत्पाद शुल्क