आज भी किसी बीमारी के होने पर घरेलू चिकित्सा में घर के आसपास पाए जाने वाले पेड़-पौधों का इस्तेमाल किया जाता है। यहां तक कि औषधीय पौधों में दिल की धमनियों से अवरोध हटाने व ट्यूमर को नष्ट करने वाले तत्व मौजूद होते हैं। इसलिए स्वास्थ्य संरक्षण की इस प्राचीन भारतीय चिकित्सा पद्धति ‘आयुर्वेद’ को पुनर्जीवित करना आवश्यक है।
इसके लिए औषधीय पौधों का रोपण किया जाए जो स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए हर दृष्टि से फायदेमंद हैं। आयुर्वेद निदेशक डॉ.सुरेश चंद्र ने ये बात राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय चंद्रावल में आयोजित कार्यक्रम में कही।
पर्यावरण संरक्षण एवं आयुर्वेदिक-यूनानी औषधियों के ज्ञान को जन-जन तक पहुंचाने के लिए आयोजित कार्यक्रम में डॉ. सुरेश चंद्र ने कहा कि औषधीय पौधों को रोपित करने और उन्हें गमलों में प्रदर्शित करने का अभियान शुरू किया गया है। क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी डॉ.शिव कुमार त्रिपाठी के नेतृत्व में ये अभियान चल रहा है।
जनपद के सभी आयुर्वेदिक एवं यूनानी चिकित्सालयों परिसर की खाली जमीन पर औषधीय पौधे लगाए जाएंगे। सभी चिकित्सालयों में औषधीय पौधों को गमलों में रोपित कर प्रदर्शित किया जाएगा उनके गुण एवं उपयोग के बारे में जानकारी भी चिकित्साधिकारियों आम-जनता को देंगे।