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नहीं हैं टीचर, हो सकती है एमबीबीएस की सीटों में कटौती

Wed, 04 May 2016 12:22 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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- फोटो : demo pic
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एक ओर प्रदेश सरकार नए-नए मेडिकल कॉलेज खोल रही, दूसरी ओर पुराने कॉलेजों में ही शिक्षकों की कमी दूर नहीं की जा पा रही है। सूबे के 12 राजकीय मेडिकल कॉलेजों में शिक्षकों के 30 फीसदी पद खाली हैं। 
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एसोसिएट प्रोफेसर के तो आधे से अधिक पद खाली हैं। वहीं प्रोफेसर के भी 36 फीसदी पदों पर नियुक्ति नहीं है। शिक्षकों की कमी के चलते मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस की सीटें भी कम होने की आशंका बनी हुई है। साथ ही पढ़ाई पर भी असर पड़ रहा है।

राजकीय मेडिकल कॉलेजों में शिक्षकों की कमी के कारण हर बार मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) के निरीक्षण में सरकार की किरकिरी होती है। जब भी सरकार एमबीबीएस की मान्यता के लिए एमसीआई में आवेदन करती है, उसमें शिक्षकों की कमी व अन्य मूलभूत सुविधाएं न होने की आपत्तियां लगा दी जाती हैं।
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अभी तक सरकार जिस मेडिकल कॉलेज का निरीक्षण होने वाला होता था वहां पर दूसरे मेडिकल कॉलेजों से शिक्षकों को बुलाकर तात्कालिक संख्या पूरी कर देती थी।
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अब श‌िक्षकों की अदला-बदली बंद

अब एमसीआई ने शिक्षकों की अदला-बदली पूरी तरह बंद कर दी है। अब शिक्षक जिस मेडिकल कॉलेज में रहेंगे उन्हें पूरा सत्र वहीं बिताना पड़ेगा। एक शिक्षक का नाम दो-दो मेडिकल कॉलेजों में नहीं हो सकता है। 

सूबे के 12 मेडिकल कॉलेजों में प्रोफेसर के कुल 315 स्वीकृत पदों के सापेक्ष 202 शिक्षक ही तैनात हैं। इनमें भी 101 संविदा के हैं। एसोसिएट प्रोफेसर की बात की जाए तो 445 पदों में से 219 पदों पर ही शिक्षक तैनात हैं। 

इनमें भी नियमित 103 और 116 शिक्षक संविदा पर तैनात हैं। लेक्चरर के पदों पर थोड़ी राहत है। 827 पदों में 696 पद भरे हुए हैं। इनमें नियमित शिक्षकों की संख्या 421 और संविदा वाले शिक्षक 275 हैं। 

मेडिकल कॉलेजों में शिक्षकों की कमी को देखते हुए सरकार ने रिटायरमेंट की उम्र भी बढ़ा दी है। यहां के शिक्षक 65 वर्ष में रिटायर हो रहे हैं। 

साथ ही शिक्षकों की भर्ती की अधिकतम उम्र की बाधा भी खत्म कर दी है। यदि रिटायरमेंट की उम्र 60 वर्ष ही रहती तो सूबे में प्रोफेसर व एसोसिएट प्रोफेसरों की और भी ज्यादा कमी हो जाती।

‘शिक्षकों की कमी दूर करने के लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। कई शिक्षकों को संविदा पर रखा गया है, जबकि कई जगह तबादले कर शिक्षक भरे जा रहे हैं। हमारी कोशिश यही है कि एमसीआई के मानकों के अनुसार शिक्षकों की कमी 10 प्रतिशत के अंदर लाई जाए। जल्द ही रिक्त सीटों पर शिक्षकों की तैनाती कर दी जाएगी।’

-डॉ. वीएन त्रिपाठी, महानिदेशक, चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण
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