मेयर व निकाय अध्यक्ष अब यह खुद बताएंगे कि उन्हें और क्या अधिकार चाहिए।
उनके पास जो अधिकार है उससे वे निकायों की आय बढ़ाने में कितने सफल हो रहे हैं। निकायों की आय बढ़ाने में उनकी कितनी भूमिका है।
आय के संसाधन बढ़ाने में उन्होंने अब तक क्या-क्या किया है। मेयर और निकाय अध्यक्षों को लिखित प्रोफॉर्मा भरकर इसे चतुर्थ राज्य वित्त आयोग को देना होगा।
आयोग निकायों की आय बढ़ाना चाहता है। इसके लिए उसे महत्वपूर्ण संस्तुतियां देनी हैं। इसलिए वह चाहता है कि मेयर और निकाय अध्यक्षों से उनकी राय पहले जान ली जाए।
इसके लिए मेयर व निकाय अध्यक्षों को पांच पेज की प्रश्नावली तैयार करते हुए 22 सवालों के जवाब मांगे हैं।
प्रदेश में 630 निकाय हैं। इसमें 13 नगर निगमों में मेयर हैं और शेष 194 पालिका परिषद व 423 नगर पंचायतों में अध्यक्ष हैं।
नगर निगम और पालिका परिषद अधिनियम में मेयर व अध्यक्षों को असीमित अधिकार देने की व्यवस्था तो है लेकिन शासन स्तर से उनके अधिकारों में लगातार कटौतियां की जा रही हैं।
इसलिए चतुर्थ राज्य वित्त आयोग यह जानना चाहता है कि उनके पास क्या अधिकार है और उन्हें क्या चाहिए।
राज्य वित्त आयोग ने जो प्रश्नावलियां भेजी हैं उसमें मेयर व अध्यक्ष का नाम-पता, शहर कस्बे का नाम, जिला, नगर निगम, पालिका परिषद व नगर पंचायत के साथ टोलीफोन व मोबाइल नंबर देना होगा।