लखनऊ। फैजुल्लागंज तृतीय से चुने गए पार्षद के निर्वाचन को शून्य घोषित कर ललित तिवारी एडवोकेट को विजेता घोषित करने और शासन के आदेश के तीन माह बाद भी महापौर के उन्हें शपथ ग्रहण न कराने को हाईकोर्ट ने गंभीरता से लिया है। लखनऊ पीठ ने कहा कि मेयर कोर्ट के आदेश व शासन के निर्देशों का पालन करने के लिए बाध्य हैं। न्यायमूर्ति राजन राय और न्यायमूर्ति अमिताभ कुमार राय की खंडपीठ ने यह आदेश ललित तिवारी की याचिका पर दिया।
कोर्ट ने बताया कि अपर जिला जज लखनऊ ने आदेश पारित कर कदाचार के आरोपी प्रदीप कुमार शुक्ला के निर्वाचन को शून्य घोषित कर ललित तिवारी को पार्षद निर्वाचित किया था। यह आदेश किसी न्यायालय ने स्थगित नहीं किया। चार फरवरी को शासन ने डीएम को आदेश देते हुए ललित तिवारी को पार्षद पद की शपथ दिलाए जाने का निर्देश दिया।
डीएम ने नगर आयुक्त के माध्यम से इसे संज्ञान में लाया, फिर कोई औचित्य नहीं रहा कि महापौर आदेश व निर्देशों को न माने। महापौर का यह कृत्य कानून की दृष्टि से सही नहीं है। हाईकोर्ट ने एक सप्ताह में जवाबी हलफनामा लगाने का निर्देश देते हुए सुनवाई की अगली तारीख सात अप्रैल तय की है।
एक नजर में मामला
अधिवक्ता ललित तिवारी ने कदाचार का आरोप लगाते हुए प्रदीप कुमार शुक्ला के निर्वाचन को चुनौती दी थी। आरोप था कि प्रदीप शुक्ला ने दोनों पत्नियों व उनसे हुईं तीनों बेटियों के तथ्य को नामांकन पत्र में छिपाया था। अपनी व पत्नियों की संपत्ति व आश्रितों की संपत्तियों, कृषि भूमि, कॉम्प्लेक्स व मकानों का विवरण भी छिपाया। 31 मई 2023 को इसे कोर्ट में चुनौती दी गई और 19 दिसंबर 2025 को न्यायालय ने अपना फैसला दिया। इसके तीन माह बाद भी महापौर के पार्षद पद की शपथ न दिलाने पर ललित तिवारी ने हाईकोर्ट में याचिका की थी।