बसपा सुप्रीमो ने कहा कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल आरएसएस के आदमी और पूरे देश से आरक्षण की व्यवस्था खत्म करने के हिमायती हैं। उनके पिता अभी भी आरएसएस की शाखा में जाते हैं।
बसपा के लोग जनता के बीच जाकर यह सच बताएं। मायावती ने माना कि दिल्ली विधानसभा के चुनाव में दलितों का पूरा वोट आम आदमी पार्टी को ट्रांसफर हो गया।
मायावती रविवार को यहां बसपा प्रदेश मुख्यालय पर 11 राज्यों के प्रमुख पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं की बैठक को संबोधित कर रही थीं। उन्होंने कहा कि कोई भी चुनाव संगठन की ताकत से ही जीता जा सकता है, पैसे के बल पर नहीं।
भाजपा पानी की तरह पैसा बहाकर भी दिल्ली चुनाव नहीं जीत पाई। वे खुद 16 फरवरी से प्रदेश के सांगठनिक कामकाज की मंडलवार समीक्षा करेंगी। उन्होंने 15 मार्च को बसपा संस्थापक कांशीराम जयंती व 14 अप्रैल को डॉ. अंबेडकर की जयंती उल्लास से मनाने का निर्देश भी दिया।
बैठक में राष्ट्रीय महासचिव सतीशचंद्र मिश्र, नसीमुद्दीन सिद्दीकी, स्वामी प्रसाद मौर्य, प्रदेश अध्यक्ष रामअचल राजभर, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष सुखदेव राजभर भी मौजूद थे।
युवाओं को मिलेगी 50 फीसदी हिस्सेदारी
बसपा सुप्रीमो मायावती ने 2017 के विधानसभा चुनाव में ‘यूपी फिर से जीतो’ का नारा देते हुए संगठन में निष्क्रिय लोगों को तत्काल पार्टी से बाहर करने का फरमान सुनाया है।
उन्होंने पार्टी में परिवारवाद पर सख्ती से रोक लगाने और युवाओं को संगठन में 50 प्रतिशत हिस्सेदारी देने का ऐलान किया। कहा कि जिन्हें अगले विधानसभा चुनाव का टिकट दिया जा चुका है, उनके टिकट नहीं कटेंगे।
पार्टी का राष्ट्रीय दर्जा खत्म होने की न करें चिंता
दिल्ली विधानसभा चुनाव में सूपड़ा साफ होने के बाद बसपा सुप्रीमो को भी पार्टी का राष्ट्रीय दर्जा छिनने का खतरा साफ दिखाई देने लगा है। उन्होंने पार्टी पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं को इस मुद्दे को लेकर परेशान न होने की सलाह दी।
मायावती ने बताया कि फिलहाल राष्ट्रीय दर्जा समाप्त करने के संबंध में चुनाव आयोग से नोटिस नहीं मिला है। यदि मिला भी तो भी पार्टी किसी भी राज्य में चुनाव की घोषणा के तीन दिन के भीतर आवेदन कर चुनाव चिह्न ‘हाथी’ हासिल कर सकेगी।
पुराने नेताओं को पार्टी से निकालने पर दी सफाई
मायावती ने पार्टी के पुराने नेताओं को निकालने पर सफाई भी दी। उन्होंने बताया कि राज्यसभा सदस्य जुगुल किशोर ने 2007, 2009 व 2012 के चुनावों में पांच से दस लाख रुपये में टिकट बेचे। अपनी पत्नी को जिला पंचायत अध्यक्ष बनवा लिया। अब वह अपने बेटे के लिए भी टिकट मांगने लगे थे।
जब उनकी कारस्तानी की खबर लगी तो जांच कर उन्हें पार्टी से बाहर कर दिया। पूर्व मंत्री दद्दू प्रसाद जीते हुए विधायक के स्थान पर टिकट चाहते थे तो पूर्व सांसद दारा सिंह राज्यसभा की सदस्यता की शर्त पर ही पार्टी में रहना चाहते थे। ऐसे में इन लोगों को पार्टी से निकालने का फैसला किया।
सपा सरकार लाचार, इसलिए राज्यपाल ने केंद्र को भेजी रिपोर्ट
मायावती ने सपा सरकार पर करारा हमला करते हुए कहा कि प्रदेश में कमजोर व लाचार सरकार होने की वजह से ही राज्यपाल राम नाईक ने छह महीने के कामकाज की रिपोर्ट पेश कर नई परंपरा शुरू की है। यह परंपरा कितनी उचित है, यह राष्ट्रपति व केंद्र सरकार को देखना चाहिए।