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'मुंह में राम बगल में छुरी' की नीति पर चल रही बीजेपी सरकार: मायावती

Wed, 06 Jun 2018 11:13 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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mayawati
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बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने कहा कि अनुसूचित जाति, जनजाति के सरकारी कर्मचारियों के प्रोन्नति में आरक्षण को सुप्रीम कोर्ट ने हमेशा ही सही व संवैधानिक माना है लेकिन इसे लागू करने में जटिलता आई है। इसी कारण यह कानूनी व्यवस्था पूरे देशभर में, खासतौर पर यूपी में कई वर्षों से निष्क्रिय व निष्प्रभावी बनी हुई है।

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इसके सही समाधान के लिए ही संविधान संशोधन विधेयक राज्यसभा से काफी संघर्ष के बाद पारित कराया गया था। पिछले चार वर्षों से इसका लोकसभा में लंबित पड़ा रहना दुखद है। इससे इन वर्गों के कर्मचारियों की अपूरणीय क्षति हुई है।

मायावती ने सुप्रीम कोर्ट के 5 जून के निर्णय पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि पहले कांग्रेस व अब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार प्रोन्नति में आरक्षण के मुद्दे पर अपना जातिवादी रवैया छोड़ने को तैयार नहीं लगती है।
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यही कारण है कि इस संबंध में संवैधानिक संशोधन विधेयक पर लगभग सर्वसम्मति होने के बावजूद लोकसभा से इसे पारित नहीं कराया जा रहा है। यह मामला लोकपाल की नियुक्ति की तरह वर्षों से लंबित पड़ा हुआ है।

उन्होंने पीएम मोदी पर कांग्रेस पार्टी की तरह ही केवल सस्ती लोकप्रियता वाली दिखावटी सहानुभूति हासिल करने का आरोप लगाया। कहा कि एससी-एसटी व ओबीसी के हित व कल्याण के लिये ठोस काम करने के मामले में इनकी सरकारों का रिकार्ड जीरो रहा है।

इनकी नीति व कार्यप्रणाली मुंह में राम बगल में छुरी की तरह से ही है। इनकी सरकारों में देश भर में दलितों, आदिवासियों व पिछड़ों के प्रति जातिवादी हिंसा व जुल्म-ज्यादती की घटनाएं काफी ज्यादा बढ़ी हैं।

उनके संवैधानिक अधिकारों को भी धीरे-धीरे छीनने का लगातार प्रयास किया जा रहा है। उनकी नौकरियों पर तो एक प्रकार से प्रतिबंध ही लगा हुआ है। कहा कि कम-से-कम अब सुप्रीम कोर्ट का ताजा निर्णय आ जाने के बाद केंद्र व राज्य सरकारों को अपने पिछले तमाम निर्णयों की समीक्षा करनी चाहिए।

एससी-एसटी वर्गों के सरकारी कर्मचारियों पर हुए अन्यायों को दुरुस्त करने के साथ-साथ उन्हें अभियान चलाकर प्रोन्नति में आरक्षण की संवैधानिक व्यवस्था का लाभ देना चाहिए।

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