बसपा सुप्रीमो मायावती ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा मुसलमानों को लेकर दिए बयान को पूरी तरह से राजनीतिक व स्वार्थपूर्ण करार दिया है। मायावती ने कहा कि प्रधानमंत्री बनने के करीब चार माह बाद एक टीवी इंटरव्यू में मोदी की ओर से देश के मुसलमानों को देशभक्त करार देना उनके स्वभाव के विपरीत है।
भाजपा व आरएसएस के साथ अन्य सहयोगी संगठनों के लोग नफरत व सांप्रदायिकता का जहर फैलाने का काम करते हैं। केंद्र की सत्ता में आने के बाद इनके इस रवैये में और बढ़ोतरी हुई है।
पीएम का गुजरात के सीएम के तौर पर मुस्लिम समुदाय के लोगों की सुरक्षा व कल्याण के संबंध में रिकॉर्ड बहुत खराब रहा है। उनकी बात न तो उनके स्वभाव से मेल खा रही है और न ही उनकी पार्टी भाजपा की विचारधारा से। इससे उनके बयान पर शंका होना स्वाभाविक है।
माया ने कहा, स्वार्थपूर्ण तो अम्मार बोले ऐतिहासिक सच
माया ने कहा एक तरफ मोदी मुसलमानों को देशभक्त बता रहे हैं। दूसरी ओर एबीवीपी के लोग लखनऊ में छात्राओं की कार्यशाला कर लव जेहाद जैसे मुद्दे को लेकर माहौल खराब कर रहे हैं। इससे साफ है कि मोदी की अधिकतर बातें राजनीति से प्रेरित व स्वार्थपूर्ण होती हैं।
वहीं, प्रदेश के पूर्व मंत्री और आल इंडिया माइनोरिटी फोरम फॉर डेमोक्रेसी के अध्यक्ष अम्मार रिजवी ने अलकायदा के संबंध में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बयान की तारीफ की है।
उन्होंने कहा कि मोदी ने ऐतिहासिक सच बयां किया है। देश के लिए मुसलमानों का योगदान किसी से कम नहीं है। उन्होंने कहा कि हम सब एक मुल्क के लोग हैं, भले ही वे कहीं से भी आए हों।
आर्य, अरबी, तुर्क, मंगोल, चीनी या दुनिया के किसी भी हिस्से लोग जो यहां बस गए हैं, वे इस देश का अभिन्न हिस्सा हैं। यहां विभिन्न संस्कृति और धर्मों की विविधता है। यह अशोक, अकबर, नानक की धरती है। अलकायदा या कोई भी आतंकी संगठन यहां दरार पैदा नहीं कर सकता।
मुसलमानों पर ये था मोदी का बयान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक अमेरिकी चैनल को दिए गए इंटव्यू में कहा था, ‘देश के मुसलमानों पर शक नहीं किया जा सकता, देश का हर मुसलमान देशभक्त है।'
जिस पर बसपा सुप्रीमो मायावती सहित कांग्रेस ने भी टिप्पणी की थी और मोदी के इस बयान को राजनीतिक करार दिया था।
यूपीए के शासनकाल में कैबिनेट मंत्री रहे सलमान खुर्शीद ने मोदी के बयान पर कहा था कि वह अमेरिका यात्रा से पहले जानबूझकर इस तरह का बयान दे रहे हैं, जो कि उनकी रणनीति का हिस्सा है।
उल्लेखनीय है कि मोदी इस माह के अंत में अमेरिका जाएंगे। मोदी की अमेरिका यात्रा इसलिए भी चर्चा का विषय है क्योंकि गुजरात दंगों में कथित संलिप्तता के कारण उनका वीजा रद्द कर दिया गया था और आम चुनाव प्रचार के दौरान उनके पक्ष में माहौल बनने पर भी अमेरिका का मोदी पर कड़ा रूख कायम रहा था।