मायावती भवन के प्रांगण में कांशीराम के साथ लगी अपनी आदमकद प्रतिमा भी दिखाने ले गईं। उन्होंने जोर देकर बताया कि वह मान्यवर कांशीराम की वसीयत के आधार पर उनकी घोषित उत्तराधिकारी हैं। इसी परिसर में खड़े दो बैटरी रिक्शे भी दिखाए।
बताया कि यहां आने वालों के लिए घूमने की व्यवस्था है। वह बातचीत में बार-बार यह बताने का प्रयास करती रहीं कि वह एक छोटे से हिस्से में ही रहती थीं और पूरा भवन कांशीराम की स्मृतियों का गवाह है।
अब यह हिस्सा छोड़ने के बाद कैबिनेट के निर्णय के मुताबिक कांशीराम यादगार स्मृति स्थल में समाहित हो जाएगा।इस भवन के स्वरूप से छेड़छाड़ जैसे सवाल पर वह तल्ख भी हुईं। कहा कि कोई इससे छेड़छाड़ करके दिखाए तो। इससे लाखों गरीबों, दलितों, पिछड़ों की आस्था जुड़ी हुई है। हालांकि उन्होंने इसे तय समयसीमा में खाली कर तमाम सवालों को विराम दे दिया।