बसपा सुप्रीमो मायावती दिल्ली से लखनऊ लौट आई हैं। इसी के साथ बसपा के भीतर सांगठनिक गतिविधियों में तेजी आने की संभावना है। पार्टी नेता इस समय भाईचारा सम्मेलनों व काडर मीटिंग के जरिये बूथ तक संगठन विस्तार में जुटे हैं।
जून में 13-ए माल एवेन्यू स्थित सरकारी आवास खाली करने के बाद मायावती अपने नए आवास 9- माल एवेन्यू में शिफ्ट हो गई थीं। वहां हो रहे निर्माण कार्यों की वजह से वह जल्द ही दिल्ली चली गई थीं। करीब तीन महीने बाद वह लखनऊ लौटी हैं।
अब लोकसभा चुनाव को लेकर पार्टी व गठबंधन से जुड़ी गतिविधियों में तेजी आने की संभावना है। सपा और बसपा दोनों ही खेमों से गठबंधन की बात कही जा रही है लेकिन किसी फॉर्मूले पर अभी सहमति के संकेत नहीं हैं। मायावती पूरी तरह चुप्पी साधे हैं।
इससे बसपा समर्थकों में भी असमंजस की स्थिति दिख रही है। उन्हें यह अंदाज नहीं लग पा रहा है कि किन सीटों पर पार्टी का प्रत्याशी आने वाला है और किस पर दूसरे दलों की मदद करनी है। दूसरी ओर भाजपा, विपक्षी दलों के कार्यकर्ताओं को अपने पाले में लाने के लिए पूरी ताकत से जुट गई है।
इसके अलावा एससी-एसटी एक्ट पर सवर्णों के विरोध, शिवपाल यादव द्वारा सपा से हटकर अलग मंच बनाने, सहारनपुर जातीय हिंसा के बाद रासुका में बंद चंद्रशेखर उर्फ रावण की रिहाई और फिर उसके द्वारा बसपा सुप्रीमो के पक्ष और भाजपा के खिलाफ बयान से प्रदेश का सियासी पारा गरम है। इस बीच, लखनऊ लौटीं मायावती रविवार को पार्टी की अगली रणनीति का संकेत कर सकती हैं।