- मौजूदा राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती या उनके बाद जो भी आगे राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया जाएगा, उसके जीते जी और न रहने के बाद भी उसके परिवार के किसी भी नजदीकी सदस्य को पार्टी संगठन में किसी भी पद पर नहीं रखा जाएगा।
- राष्ट्रीय अध्यक्ष के परिवार के किसी भी नजदीकी सदस्य को न कोई चुनाव लड़ाया जाएगा और न ही उसे राज्यसभा सांसद, एमएलसी या मंत्री आदि बनाया जाएगा।
- राष्ट्रीय अध्यक्ष पद को छोड़कर अन्य सभी स्तर के पदाधिकारियों के परिवार के लोगों पर विशेष परिस्थितियों में ये शर्तें लागू नहीं होंगी।
- बसपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष अपनी ज्यादा उम्र की वजह से जब पार्टी व फील्ड में काम करने में खुद को कमजोर महसूस करे तो उसकी सहमति से ही उसे बसपा का राष्ट्रीय संरक्षक नियुक्त कर दिया जाएगा। राष्ट्रीय संरक्षक की सलाह के मुताबिक ही बसपा का नया बना राष्ट्रीय अध्यक्ष काम करेगा।
- बसपा का जनाधार बढ़ाने के लिए पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष कुछ वरिष्ठ, योग्य व सक्षम लोगों को राष्ट्रीय स्तर पर नेशनल कोऑर्डिनेटर नियुक्त करेगा। ये राष्ट्रीय अध्यक्ष के निर्देशन में पूरे देश में संगठन के कार्यों की समीक्षा करेंगे।
मायावती ने संविधान के नए प्रावधान पर कदम उठाते हुए बसपा के राष्ट्रीय महासचिव वीर सिंह और राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जयप्रकाश सिंह को नेशनल कोऑर्डिनेटर नियुक्त कर दिया। माया ने बड़ी जिम्मेदारी देने के साथ ही वीर सिंह से महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के कोऑर्डिनेटर की जिम्मेदारी वापस ले ली है। इसी तरह जेपी सिंह को दिल्ली व राजस्थान के कोऑर्डिनेटर पद से हटा दिया गया है। मायावती ने अधिवेशन में बताया कि गौतमबुद्धनगर के रहने वाले जेपी सिंह भी दलित हैं। पार्टी के लिए परिवार छोड़ने के साथ ही अविवाहित भी हैं।
...अभी उत्तराधिकारी बनने का कोई न देखे सपना
मायावती ने वीर सिंह और जेपी सिंह को बड़ी जिम्मेदारी सौंपने के साथ ही आगाह भी किया। उन्होंने कहा, मैं इन दोनों लोगों पर अभी निर्भर रहने वाली नहीं हूं। अगले 20-22 वर्षों तक खुद ही आगे व सक्रिय रहकर पार्टी को बढ़ाऊंगी। ऐसे में 20-22 वर्ष तक किसी को भी पार्टी का मुखिया बनने और मेरा उत्तराधिकारी बनने का सपना नहीं देखना चाहिए।