करोड़ों रुपयों के लैकफेड घोटाले में बसपा सरकार में मंत्री रहे बादशाह सिंह, चंद्रदेव राम, लैकफेड के पूर्व महाप्रबंधक पंकज त्रिपाठी, पूर्व प्रबंध निदेशक ब्रह्म प्रकाश सिंह तथा मुख्य अभियंता गोविंद शरण श्रीवास्तव सहित कुल 12 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय कर दिए गए।
घोटाले के आरोपी पूर्व सहकारिता मंत्री तथा एनआरएचएम घोटाले में डासना जेल में बंद बाबू सिंह कुशवाहा तथा पूर्व माध्यमिक शिक्षा मंत्री रंगनाथ मिश्र के जेल से न आने के कारण उन पर आरोप तय नहीं किए जा सके।
ये रहे आरोपी
भ्रष्टाचार निवारण के विशेष न्यायाधीश लल्लू सिंह ने रंगनाथ तथा बाबू सिंह को कोर्ट में पेश करने का आदेश देते हुए सुनवाई के लिए 2 जुलाई की तारीख तय की है।
इसके पहले कोर्ट में पूर्व मंत्री रंगनाथ मिश्र, चंद्रदेव राम, बादशाह सिंह, लैकफेड के पूर्व एमडी ब्रह्म प्रकाश सिंह, पूर्व निदेशक भूतत्व एवं खनिकर्म रामबोध मौर्य, पूर्व महाप्रबंधक (वित्त एवं प्रशासन) पंकज त्रिपाठी, पूर्व मुख्य अभियंता गोविंद शरण श्रीवास्तव, लेखाकार अनिल अग्रवाल।
लैकफेड चेयरमैन सुशील कटियार के कथित पीआरओ प्रवीण कुमार सिंह, बरेली मंडल के प्रभारी अधिशासी अभियंता संजय कुमार, बरेली मंडल के अभियंता दिनेश कुमार सिंह, अधिशासी अभियंता अजय कुमार दोहरे तथा पीएनबी के लालबाग शाखा के तत्कालीन वरिष्ठ प्रबंधक दीपक दवे।
किस पर क्या लगाये गये आरोप
चन्द्र देव राम: मंत्री रहने के दौरान विभाग की क्लस्टर योजना के कार्य कराने के लिए लैकफैड को कार्यदायी संस्था नामित करने के लिए 2 करोड़ की रिश्वत ली।
बादशाह सिंह : भारत सरकार की योजना श्रमिक अड्डे बनवाने के लिए लैकफेड को कार्यदायी संस्था नामित करने के लिए खरेला महोबा में 5 करोड़ की रिश्वत ली।
पूर्व निदेशक खनिजकर्म एवं भूतत्व राम बोहा मौर्य : निदेशक रहने के दौरान सहाकरिता मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा तथा लैकफेड के अधिकारियों के साथ सांठ-गांठ की तथा उप्र प्रोजेक्ट परियोजना के नाम से स्वीकृत कार्य के अन्तर्गत मकरवई में 4.2 किमी. सड़क निर्माण का कार्य लैकफेड को दिया तथा 209.35 लाख की पहली किश्त जारी की और 10 लाख रिश्वत ली।