सिंचाई विभाग में इन दिनों मायावती सरकार के समय के पुराने मामले खुलने लगे हैं। इनमें से कई मामलों में अभियंताओं की लापरवाही सामने आई है।
सरकार ने कई अभियंताओं के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की है। करीब तीन साल पहले एल्गिन ब्रिज का गोंडा जिले में पड़ने वाला चरसरी तटबंध टूट जाने से कई गांव प्रभावित हुए थे।
इसमें जन-धन की काफी हानि हुई थी। सरकार ने गोंडा बाढ़ कार्य खंड में कार्यरत तत्कालीन अधिशासी अभियंता मिर्जा रेहान बेग के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं।
प्रमुख सचिव सिंचाई सुरेश चंद्रा ने प्रमुख अभियंता को भेजे निर्देश में तत्काल प्राथमिकी दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं।
तत्कालीन अधिशासी अभियंता ने 13.72 लाख रुपये का भुगतान निर्माण व अनुरक्षण मद में कर दिया था।
साथ ही वर्ष 2010-11 में बाढ़ नियंत्रण के लिए मंजूर 200 लाख रुपये व बाढ़ अनुरक्षण के लिए मंजूर 113.75 लाख रुपये का उपयोग भी स्वीकृत कार्यों के बजाय दूसरी जगह कर दिया था।
यही वजह है कि समय रहते एल्गिन ब्रिज के चरसरी तटबंध की मरम्मत नहीं हो सकी और बाद में यह क्षतिग्रस्त हो गया था।
मुख्य अभियंता अनुसंधान एवं नियोजन की जांच में अधिशासी अभियंता मिर्जा रेहान बेग वित्तीय मामलों के भी दोषी पाए गए। इसी आधार पर सरकार ने इनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं।
इसी तरह गोंडा जिले के ही सरयू नहर खंड-प्रथम में भी अनियमितता का चार साल से अधिक पुराना मामला सामने आया है। इसमें तत्कालीन अधिशासी अभियंता कुमैल अशरफ खां की लापरवाही सामने आई है।
हालांकि वे अब रिटायर हो चुके हैं। नियमों के अनुसार अब उन्हें आरोप पत्र भी नहीं दिया जा सकता। इस पर प्रदेश सरकार ने कड़ी नाराजगी जताते हुए इस मामले में समय रहते आरोप पत्र क्यों नहीं दिया गया।
इस बारे में स्पष्टीकरण के साथ ही दोषी अधिकारी व कर्मचारी का विवरण भी मांगा है। एक अन्य मामला महराजगंज जिले का सामने आया है।
यहां पर भी करीब चार साल पहले अभियंताओं ने बिना टेंडर मंगाए ही निर्माण सामग्रियों की आपूर्ति करा दी। टेक्निकल ऑडिट सेल (टीएसी) की प्रारंभिक जांच में यहां के तत्कालीन अधीक्षण अभियंता से लेकर सहायक अभियंता दोषी पाए गए थे।
इसी आधार पर सरकार ने मुख्य अभियंता पश्चिम को पांच अभियंताओं के खिलाफ जांच के निर्देश दिए थे।
इनमें तत्कालीन अधीक्षण अभियंता पीसी मिश्रा, अधिशासी अभियंता अशोक कुमार सिंह, सहायक अभियंता मुन्ना लाल सचान, हरिशंकर व राधा विनोद कुमार सिंह शामिल हैं।
इनमें से अशोक कुमार सिंह व हरिशंकर की जांच रिपोर्ट सरकार को नहीं मिली है। प्रमुख सचिव सिंचाई सुरेश चंद्रा ने कड़ी नाराजगी जताते हुए तत्काल जांच रिपोर्ट पेश करने के लिए कहा है।
इलाहाबाद व गोंडा के पुराने मामलों की भी जांच शुरू
सिंचाई विभाग ने पिछले दिनों इलाहाबाद के एक पुराने मामले की भी जांच के निर्देश दिए थे। सौरांव रजवाहा के छह किलोमीटर तक सुदृढ़ीकरण का काम बगैर एस्टीमेट पास कराए ही करवा दिया गया।
इस मामले की जांच कर लीपापोती कर दी गई। जब यह मामला शासन की जानकारी में आया तो फिर से इसकी जांच कराने के निर्देश दिए गए हैं।
इसी तरह सरयू नहर खंड-4 गोंडा में पुलों व पुलियों के घटिया निर्माण व टेंडर प्रक्रिया में गोलमाल किए जाने की जांच शुरू हो गई है।
सरकार ने छह वर्ष पुराने इस मामले में छह अभियंताओं की जांच कराने के निर्देश दिए हैं। हालांकि इनमें से दो अभियंता रिटायर हो चुके हैं। जांच मुख्य अभियंता बेतवा को सौंपी गई है।
गाजीपुर के अधिशासी अभियंता को चार्जशीट देने की तैयारी
गाजीपुर की देवकली पंप नहर प्रखंड-प्रथम में कार्यरत अधिशासी अभियंता उमाशंकर लवनिया के खिलाफ जांच बैठाने की तैयारी शुरू हो गई है। सरकार ने आरोप पत्र बनाने के निर्देश दिए हैं।
अधिशासी अभियंता पर आरोप है कि वे विभाग व शासन द्वारा मांगी गई जरूरी सूचनाएं नहीं देते हैं। विधानसभा में भी नियम 301 के तहत विधायक सुभाष पासी के प्रश्नों की सूचना उन्होंने नहीं दी।
इसके अलावा अपने अधीक्षण अभियंता द्वारा मांगी गई महत्वपूर्ण सूचना भी नहीं दी। प्रमुख सचिव सिंचाई ने जांच अधिकारी के नाम का पैनल प्रमुख अभियंता जांच से मांगा है। जांच अधिकारी तय होने के बाद उनकी जांच शुरू हो जाएगी।