अलीगंज का पानी लोगों की सेहत को नुकसान पहुंचा रहा है। यहां दूषित पानी पीने के कारण लोग अमीबायसिस की चपेट में आ रहे हैं। यही नहीं एनीमिया की शिकायतें भी अलीगंज क्षेत्र में रहने वाली महिलाओं में ज्यादा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अमीबायसिस भी यहां एनीमिया की एक प्रमुख वजह हो सकती है।
अमर उजाला के ‘बेटी ही बचाएगी’ अभियान के तहत रोटरी क्लब ऑफ लखनऊ खास के सहयोग से रविवार को विश्वेश्वर दयाल दयाल इंटर कॉलेज में लगाए गए मुफ्त चिकित्सा शिविर में यह हकीकत सामने आई।
अलीगंज शिविर में क्या खास रहा इस सवाल पर रिटायर्ड जॉइंट डायरेक्टर मेडिकल एंड हेल्थ डॉ. आर.सी. चड्ढा बताते हैं कि शिविर में उन्हें यहां सबसे ज्यादा मामले अमीबायसिस के देखने को मिले।
वह कहते हैं कि शिविर में पहुंचे हर चौथे मरीज में अमीबायसिस या इससे जुड़ी परेशानी मसलन खून की कमी की शिकायत के साथ पहुंचा। कई महिलाओं व युवतियों में कमर और घुटनों की दर्द की शिकायत सामने आई।
ये जानना भी जरूरी
अमीबायसिस एंटअमीबा हिस्टोलिटिका नामक परजीवी के संक्रमण के कारण होता है। यह संक्रमण आंतों में होता है। यह अमीबिक कोलाइटिस यानी आंतों की लाइनिंग में गंभीर संक्रमण का कारण हो सकता है।
यही नहीं रक्त प्रवाह के साथ अगर संक्रमण लिवर तक पहुंच गया तो यह अमीबिक लिवर एब्सेसेस यानी मवाद पड़ने जैसी समस्या आ सकती है। संक्रमण के बाद पेट में ऐंठन के साथ ही डायरिया, जिसमें मल के साथ म्यूकस या खून आने की शिकायत आम होती है।
अलीगंज में दूषित पानी से यह समस्या आ रही है तो यह सवाल उठता है कि ऐसे में तो इस इलाके के सभी लोग अमीबायसिस की चपेट में होने चाहिए। यूके के डॉक्टरों को भी कुछ ऐसे सवाल ने परेशान किया था।
उनके अध्ययन में सामने आया कि ए. हिस्टोलिटिका के संक्रमण के दस मामलों में से महज एक में ही अमीबायसिस का लक्षण प्रमुखता से सामने आता है।
अमीबायसिस से पीड़ित 90 फीसदी ऐसे केसेज होते हैं जिनमें इस बीमारी के प्रमुख लक्षण सामने नहीं आते या लक्षण कुछ देर के लिए सामने आते हैं।
डॉ. आर.सी. चड्ढा इस सवाल पर कहते हैं कि पानी को अगर उबाल कर पीया जाए और कुछ भी खाने से पहले हाथों को सही ढंग से धुला जाए तो इस समस्या से बचा जा सकता है।
अगर अमीबायसिस के लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं। दवा और प्रचुर मात्रा में तरल पदार्थों को लेकर डिहाइड्रेशन यानी शरीर में पानी की कमी को रोका जा सकता है।
कहीं आपकी लापरवाही तो नहीं दे रही दर्द
अमीबायसिस और एनीमिया के बाद सबसे ज्यादा महिलाएं व युवतियां पैरों और कमर में दर्द रहने की शिकायत लेकर पहुंचीं।
विवेकानंद पॉलीक्लीनिक से जुड़े वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. सुदर्शन याग्निक इस समस्या का कारण पूछने पर कहते हैं-देखिए, आज हमने जितने मरीज देखे उनकी बात करें तो हर पांचवीं महिला इन्हीं शिकायतों के साथ आई थी।
आखिर यह समस्या आ क्यों रही है, इस सवाल पर उन्होंने कहा-दरअसल महिलाओं में कुपोषण की समस्या अधिक है। वे पूरे परिवार के खानपान का ध्यान तो रखती हैं पर खुद का खयाल नहीं रख पातीं।
ज्यादातर केसेज में संतुलित आहार नहीं लिए जाने के कारण ऐसी समस्याएं देखने को मिल रही है। कैल्शियम का सबसे अच्छा स्रोत दूध है लेकिन शहरी इलाके में जो गरीब परिवार हैं वे महंगे दूध का खर्च नहीं उठा सकते।
दूसरे स्रोतों से लिया गया कैल्शियम शरीर में उतने अच्छे से अब्जॉर्ब नहीं हो पाता, जितना कि दूध का कैल्शियम। खानपान में लापरवाही आगे चलकर बड़ी समस्याओं का कारण बन जाती है।
गुटखा-तंबाकू बढ़ा रहा पेट की समस्याएं
गुटखा-तंबाकू का बढ़ता सेवन पाचनतंत्र पर भारी पड़ रहा है। पाचनतंत्र के गड़बड़ाने से कब्ज और बवासीर की समस्याएं बढ़ रही हैं।
लोकबंधु राजनारायण संयुक्त चिकित्सालय के वरिष्ठ सर्जन डॉ. एसपी मिश्रा बताते हैं कि आजकल महिलाओं में भी गुटखा सेवन की प्रवृत्ति देखने को मिल रही है।
इसकी वजह से भूख नहीं लगने, कब्ज जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं। कब्ज कई बीमारियों का कारक हो सकता है। बवासीर इसमें से प्रमुख है।