जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि सहारनपुर में शेखुल हिंद मौलाना महमूद हसन मेडिकल कॉलेज पर कोई सियासत करने की जरूरत नहीं है।
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उन्होंने आजादी के आंदोलन से लेकर शिक्षा समेत अन्य क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले शेखुल हिंद महमूद हसन के नाम से कॉलेज का नामकरण करने को सराहा।
उन्होंने कहा कि सेहत का सरोकार सबसे है और यह सौगात हर मजहब के लोगों के लिए है। मंगलवार दोपहर उद्घाटन समारोह के दौरान पत्रकारों से संक्षिप्त बातचीत में मदनी ने यह बात कही।
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उन्होंने कहा कि सरकार की इस कोशिश से जिले के साथ ही वेस्ट यूपी को नई पहचान मिलेगी। मुल्क के लिए ऐसे प्रयास होते रहने चाहिएं। उन्होंने कहा कि जमीयत करीब 60 साल से ऐसे ही कामों के लिए संघर्ष करती आई है। अब मेडिकल कॉलेज जैसी कामयाबी उन्हीं कोशिशों का असर है।
मदनी-मुलायम से मिलने की चाह धरी रही
सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव, मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष अरशद मदनी से मुलाकात की कोशिश में मंगलवार दोपहर यहां मेडिकल कॉलेज परिसर में करीब एक घंटे तक हंगामा चला।
भारी भीड़ और मीडिया से घिरते हुए जब वे प्रधानाचार्य कक्ष में पहुंचे तो बाहर कमांडो और पुलिस ने सुरक्षा घेरा बना लिया।
इस दौरान मदनी और मुलायम से मुलाकात की उम्मीद लेकर पहुंचे कई बड़े नेताओं के साथ ही जमीयत से जुड़े देवबंद और अन्य जिलों के प्रतिनिधियों को बाहर ही रहना पड़ा।
मदनी और मुलायम से मुलाकात न होने पर मायूस कुछ लोगों ने खुद को मौलाना बताते हुए कहा, हमसे ठीक से पेश आइए जनाब। बात नहीं करानी है तो न कराइए, मगर तहजीब से पेश आइए।
अंदर थे मदनी-मुलायम, बाहर से दरवाजा बंद
दोपहर 12:40 बजे से लेकर 1:45 बजे तक अरशद मदनी, मुलायम सिंह, अखिलेश यादव और सपा राष्ट्रीय उपाध्यक्ष चौधरी यशपाल प्रधानाचार्य कक्ष में मौजूद रहे। बाहर से दरवाजा बंद रहा।
इस दौरान खुद को जमीयत से जुड़ा बताते हुए कई मौलाना कक्ष तक पहुंचे और मदनी एवं मुलायम से मुलाकात की कोशिश की तो कमांडो, एसएसपी मनोज कुमार, एडीएम दिनेश चंद्रा सहित अन्य अफसरों ने उन्हें अंदर नहीं जाने दिया।
उन्हें यह कहा जाता रहा कि रैली में पहुंचो, वहीं मिलेंगे। इंतजार करने वालों में पूर्व सांसद मंसूर अली खान, जिला पंचायत के पूर्व चेयरमैन इरशाद चौधरी आदि शामिल रहे।
युवाओं ने दिखाया जोश-जुनून
सपा की ‘देश बचाओ, देश बनाओ’ रैली में युवाओं ने भी अपने जोश और जुनून का परिचय दिया। शहर, कस्बों से ही नहीं दूरदराज के ग्रामीण अंचलों से भी युवाओं ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
वेस्ट यूपी के दस जिलों की इस महारैली में रैली स्थल से लेकर सड़क तक युवाओं की ही आवाज बुलंद रही। हर कोई मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की झलक पाने को आतुर था।
रैली के प्रभारी मंत्री और पंचायत राज मंत्री बलराम यादव ने रैली से पूर्व तैयारियों की समीक्षा बैठक में स्पष्ट कहा था कि युवा ही इस देश के कर्णधार होंगे, पार्टी हाईकमान इसे लेकर बेहद गंभीर भी है।
मंगलवार को रैली में इसका असर भी दिखा। मुजफ्फरनगर, कैराना और सहारनपुर के युवाओं ने बढ़ चढ़कर भागीदारी की।
अपने प्रत्याशियों के नाम की लाल टोपी और ढोल-नगाड़ों के साथ युवा रैली स्थल पहुंचे। रैली में पार्टी के दिग्गज नेताओं ने भी युवा प्रत्याशियों के इस जोश की तारिफ के पुल बांधे।
सपा की रैली में आई सैकड़ों बसों, कारों और ट्रैक्टर ट्रॉलियों से अंबाला हाईवे जाम हो गया। यहीं स्थिति जिला अस्पताल पुल से पेपर मिल रोड पर बनी रही। लोग भी जाम में फंसकर घंटों बेहाल रहे।
मंगलवार को सुबह नौ बजे से ही वाहनों में सवार लोगों का महारैली में पहुंचना शुरू हो गए थे।
दोपहर 12 बजे अंबाला हाईवे पर लोगों का पैदल हुजूम उमड़ पड़ा और रैलीस्थल से लेकर अंबाला रोड पुल तक करीब सात किलोमीटर लंबी वाहनों की कतार लग गई। इससे पूरा हाईवे जाम हो गया।
जाम के कारण दुपहिया वाहनों को भी निकलने का रास्ता नहीं मिला। ट्रैफिक संचालन में लगे पुलिस कर्मियों को भी पसीना छूट गया।
रैली का समय साढ़े 11 बजे का था, लेकिन ढाई बजे तक वाहनों का रैलीस्थल की ओर जाने का सिलसिला चलता रहा। रैली समाप्त होने के बाद भी विकट स्थिति बनी।