बिस्मिल्लाह कहो या राम, सलाम तो एक ही जगह पहुंचता है। राजधानी में इंसानियत का यह पैगाम गूंजा संत मोरारी बापू की रामकथा के मंच पर। मंच पर मौजूद शिया धर्म गुरु मौलाना डॉ. कल्बे सादिक ने भी यही कहा-राम और हुसैन में कोई मतभेद नहीं।
शिया धर्मगुरु डॉ. कल्बे सादिक ने कहा, राम और हुसैन में कोई मतभेद नहीं है। धर्म किरदार से बनता है। हिंदू एक प्यारा धर्म है। जब से गीता का अध्ययन किया हिंदू धर्म के प्रति सम्मान बढ़ा है। धर्म किरदार से पहचाना जाता है। खाली वेश बदलने से धार्मिक नहीं हुआ जा सकता।
कोई भी धर्म कभी भी किसी के लिए मुसीबत नहीं बन सकता। जिस भारत से इमाम हुसैन को मोहब्बत थी तो हम मुसलमानों को भी भारत से उतनी ही मोहब्बत है। धर्म मतभेद रखने से नहीं एक दूसरे के सम्मान से बढ़ता है।
मौलाना ने कहा कि धर्म व धार्मिक ने समाज को नहीं बांटा बल्कि सम्राट ने धर्म को बांटा और नुकसान पहुंचाया है। आज लक-नाऊ है। आज मेरा लक है कि मुझे आपके दरबार में आने का मौका मिला है।
बिस्मिल्लाह और जय श्रीराम एक ही बात : मोरारी बापू
कार्यक्रम में मौलाना सादिक और मुरारी बापू
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मौलाना सादिक के आने पर मोरारी बापू ने कहा कि जिस निष्पक्ष और निडरता से सादिक जी ने अपना व्याख्यान दिया, यही सच्चा धर्म है। सच्चे धर्म का पालन करने वाला निडर और निष्पक्ष होता है। वह हमेशा दूसरों का आदर करेगा।
सादिक जी ने बिस्मिल्लाह से अपनी तकरीर की, खुशी हुई। क्योंकि बिस्मिल्लाह हो चाहे जय श्रीराम यह सलाम जाता एक ही जगह है। मौलाना सादिक और हम कई जगह संग-संग तकरीर कर चुके हैं। उन्होंने आगे बढ़ाते हुए कहा कि एवरेस्ट पर चढ़ने के बाद कोई मंजिल बाकी नहीं रहती।
मोरारी बापू ने कहा कि धर्माचार्य कोई भी हो उसमें तीन लक्षण निर्भय, निष्पक्ष और निव्यय होने चाहिये। नोटबंदी के मुद्दे से जोड़ते हुए अपनी कथा में गोवध को रोके जाने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि जैसे एक रात्रि में नोटबंदी हो सकती है ऐसे ही एक रात्रि में गौवधबंदी क्यों नहीं हो सकती।
मौलाना डॉ. कल्बे सादिक ने मोरारी बापू को पांच दिसंबर को अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में हुसैन कथा में आने का न्यौता देते हुए कहा कि राम कथा की तरह मोरारीजी हम सब को हुसैन कथा भी सुनाएंगे।