मुस्लिम लीडरशिप पर सवाल उठाते हुए मौलाना कल्बे सादिक कहते हैं कि मुस्लिम लीडरशिप या तो जाहिल है या भ्रष्ट।
इसी वजह से मुस्लिम बिरादरी पिछड़ रही है।
अमर उजाला से खास बातचीत में उन्होंने यह भी कहा कि मुस्लिम समाज में शादी व तलाक के मामलों में औरतों के साथ बहुत नाइंसाफी हो रही है।
अधिकतर धर्मगुरु अपनी जिम्मेदारियों से मुंह मोड़े हुए हैं।
बातचीत के इस क्रम में वे खुद को मुस्लिम लीडरशिप पर टिप्पणी करने से रोक नहीं पाए।
वह कहते हैं कि मैं शिया हूं। शियों में हजरत पैगंबर के बाद हजरत अली के संदेश मायने रखते हैं। हजरत अली ने कहा था कि वह हर एक से दोस्ती को तैयार हैं पर जाहिल और भ्रष्ट से नहीं।
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अफसोस है कि आज की अधिकतर मुस्लिम लीडरशिप या तो जाहिल है या भ्रष्ट। यह फैक्टर मुस्लिम बिरादरी के पिछड़ेपन का एक बड़ा कारण है।
लीडरशिप साफ सुथरे हाथों में आ जाए तो कौम की सूरत बदल सकती है। इसके साथ उन्होंने शादी व तलाक में मामलों में कहा कि मुस्लिम समाज में औरतों के साथ बहुत नाइंसाफी हो रही है।
शादी को इतना महंगा कर दिया गया है कि तमाम मुस्लिम बच्चियां अब शादी से ही वंचित हो रही हैं। तलाक को तो मर्दों के हाथों में नाइंसाफी का आसान और सस्ता औजार दे दिया गया है।
तलाक को लेकर मुस्लिम मर्द हमारी बच्चियों के साथ बेजा जुल्म कर रहे हैं। बकौल सादिक मुस्लिम धर्मगुरुओं की नैतिक जिम्मेदारी बनती है कि वह नाइंसाफी से बच्चियों को बचाएं।
मौलाना आजाद व एपीजे अबुल कलाम
मौलाना सादिक का कहना है कि मुस्लिम समाज की सबसे बड़ी समस्याएं हैं, गरीबी व अज्ञानता। कौम जब इन दो समस्याओं से उबर जाएगी तो मुस्लिम लीडरशिप भ्रष्ट व जाहिल लोगों की बजाय मौलाना अबुल कलाम आजाद और एपीजे अबुल कलाम जैसों के हाथों में आ जाएगी।
फिलहाल धार्मिक व सियासी दुनियां में इक्का-दुक्का ही चिराग हैं जो घुप अंधेरे में टिमटिमा रहे हैं। मैं तो बस यही दुआ करूंगा कि इन चिरागों की लौ और बढ़ती जाए।
धर्मगुरू और वोट पॉलिटिक्स
मौलाना का मानना है कि हर धर्म का उपदेश सत्य का पालन करना होता है। पर जब धर्मगुरू सत्य की बजाय सत्ता को लालच की नजरों से देखने लगता है तो सारी विकृतियां जन्म लेती हैं।
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