विद्यार्थियों की शुल्क प्रतिपूर्ति के लिए अब पूरे प्रदेश में एक सूची बनेगी।
अभी तक जिलेवार सूची बनती थी, जिससे किसी जिले में अधिक आय वर्ग वाले विद्यार्थी की शुल्क प्रतिपूर्ति हो जाती थी, जबकि दूसरे जिले में कम आय वर्ग वाला विद्यार्थी भी इस सुविधा से वंचित रह जाता था।
इस व्यवस्था को हाईकोर्ट ने भी संविधान में दिए गए समानता के अधिकार के खिलाफ बताया था। इसलिए समाज कल्याण निदेशालय ने प्रदेश स्तर पर ही सूची बनाने का फैसला किया है।
विभिन्न व्यावसायिक और गैर व्यावसायिक कोर्सेज में दाखिला लेने वाले सामान्य और अनुसूचित जाति के छात्रों की शुल्क प्रतिपूर्ति समाज कल्याण विभाग करता है।
अब तक लागू व्यवस्था के अनुसार, जिलेवार रकम की डिमांड एनआईसी के मार्फत वेबसाइट पर अपलोड की जाती थी। फिर सभी जिलों को उनकी कुल मांग (धनराशि) का एक निश्चित प्रतिशत जारी कर दिया जाता था।
मसलन, वर्ष 2011-12 में हर जिले को उनकी कुल डिमांड का 37.7 फीसदी हिस्सा जारी किया गया।
कहां हुई चूक
इससे गड़बड़ यह हुई कि एक जिले में अधिक आय वर्ग वाले विद्यार्थियों के शुल्क की प्रतिपूर्ति हो गई, जबकि दूसरे जिले में उससे कम आय वर्ग वाले विद्यार्थियों को अंत तक इस सुविधा का लाभ नहीं मिल सका।
समाज कल्याण विभाग के संयुक्त निदेशक विशेश्वर सिंह ने बताया कि सत्र 2013-14 में पूरे प्रदेश को एक यूनिट मानते हुए विद्यार्थियों की सूची तय की जाएगी। प्राथमिकता के लिहाज से कुल चार श्रेणियों में विद्यार्थियों को रखा गया है।
तय हुईं ये श्रेणियां
एक, सरकारी संस्थानों में पढ़ने वाले विद्यार्थी। दो, सहायता प्राप्त सरकारी संस्थानों में पढ़ने वाले विद्यार्थी। तीन, निजी संस्थानों में श्रेणी ग यानी काउंसलिंग के मार्फत दाखिला लेने वाले।
चार, निजी संस्थानों में श्रेणी घ यानी मैनेजमेंट सीट पर दाखिला लेने वाले विद्यार्थी। एक श्रेणी संतृप्त होने पर ही उससे अगली श्रेणी के विद्यार्थियों की बारी आएगी।
किसी भी श्रेणी में शुल्क प्रतिपूर्ति के लिए बजट कम होने पर कम आय वर्ग वाले विद्यार्थियों को तरजीह दी जाएगी।