पुलिस यदि समय पर चेत जाती तो मथुरा के जवाहरबाग की घटना न होती और न ही उसके दो बहादुर अफसरों की शहादत होती।
जवाहरबाग के 200-250 कथित सत्याग्रहियों ने सदर तहसील पर हथियारों से लैस होकर 4 अप्रैल 2016 को हमला बोला था। इस दौरान उनके हाथों में असलहों के अलावा लाठी-फरसे भी थे। इन लोगों ने यहां कर्मचारियों की पिटाई भी की थी।
संग्रह अमीन चन्द्र मोहन मीना ने किसी तरह छुपकर अपनी जान बचाई थी। इसकी रिपोर्ट भी मीना ने मथुरा के सदर थाने में दर्ज कराई थी। रिपोर्ट 8 अप्रैल को मुकदमा अपराध संख्या 175 के तहत दर्ज की गई।
यह मुकदमा 200 से 250 अज्ञात लोगों के खिलाफ धारा 147,148,149, 332, 352 और 353 के तहत दर्ज हुआ था। इसमें संग्रह अमीन ने साफ कहा था कि हमलावरों के हाथों में हथियार थे। इसके बावजूद पुलिस ने शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया।
यदि समय रहते पुलिस इन कथित सत्याग्रहियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करती और उन्हें जवाहरबाग से खदेड़ देती, तो इतनी बड़ी घटना न होती।
ऑपरेशन में लापरवाही हुई तो जांच में सामने आ जाएगा सच
मथुरा के मास्टरमाइंड रामवृक्ष यादव की मौत की पुष्टि करते हुए डीजीपी जावीद अहमद ने कहा कि जवाहरबाग के ऑपरेशन में लापरवाही हुई यह कहना अभी सही नहीं है। जांच के बाद ही सारा सच सामने आ जाएगा। हालांकि यह बात सही है कि जिस तरह से पुलिस की टीम पर हमला बोला गया उसका अंदाजा लगाने में पुलिस से चूक हुई है।
डीजीपी ने कहा-25 मौतों में 11 की जलने से हुई थी मौत
डीजीपी ने बताया कि मथुरा में दो पुलिस अफसरों के अलावा 23 की मौत हुई है। इनमें से 11 की मौत आग में जलने के कारण हुई।
जबकि 12 की मौत लाठी-डंडे से हुई पिटाई के कारण हुई। डीजीपी ने बताया कि अब ज्यादातर सभी की शिनाख्त हो गई है। राम वृक्ष यादव पर ही संशय था वह भी अब दूर हो गया है। वैसे, सूत्रों के अनुसार मथुरा हिंसा में अब तक 28 लोगों की मौत हुई है।
दस उपद्रवियों के शवों की शिनाख्त
जवाहर बाग में मिले अज्ञात शवों में दस की शिनाख्त हो गई है। शनिवार देर रात पुलिस ने इनकी सूची जारी की। इनमें कब्जाधारियों के मुखिया रामवृक्ष यादव निवासी रामपुर बागसुर मरदह जिला गाजीपुर के अलावा महेश जयसवाल पुत्र प्यारेलाल निवासी गायघाट थाना उसका सिद्धार्थ नगर, उदय राज मौर्या निवासी बिसनपुरवा थाना ऊंचाहार रायबरेली, ऋषिपाल उर्फ रिशी पुत्र रज्जो लाल निवासी बेतिया बिहार, आशा देवी निवासी ग्राम गादरा, नागपुर बक्सर बिहार, पूनम गुप्ता पुत्री विंध्याचल गुप्ता निवासी बसई थाना राजपुर बक्सर बिहार, टीटी बाबू कानपुर नगर, रामलखन वर्मा, एक शव परविंदर उर्फ प्रवीण के दादा का और एक मुजफ्फरपुर बिहार निवासी एक डाक्टर का बताया जा रहा है, जो इनका इलाज करता था।