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शहीद की सम्मान राशि के लिए भटक रही मां, 15 वर्षों तक चक्कर लगाने के बाद पिता का भी हो गया निधन

Wed, 08 Jan 2020 12:32 PM IST
ishwar ashish मनीष मिश्र/अमर उजाला, लखनऊ
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शहीद विवेक की मां सावित्री सक्सेना - फोटो : अमर उजाला
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देश के लिए एक सपूत ने जान कुर्बान कर दी, वहीं उसकी मां 17 वर्ष बाद भी शहीद बेटे की सम्मान राशि के लिए भटक रही है। आठ जनवरी 2003 को मणिपुर के चंदेल जिले के गांव तंपक में 250 आतंकवादियों से लोहा लेते हुए बीएसएफ के सहायक कमांडेंट विवेक सक्सेना (29) शहीद हो गए थे।

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उनके पिता राम स्वरूप सक्सेना को तत्कालीन राष्ट्रपति एपीजे कलाम ने शौर्य चक्र प्रदान किया था। विवेक को सम्मान पत्र के साथ एक राशि भी दी जानी थी। इसके लिए राम स्वरूप 15 वर्षों से रक्षा मंत्रालय से लेकर प्रदेश सरकार के कार्यालयों तक चक्कर लगाते रहे।

पिछले वर्ष उनका निधन हो गया, लेकिन बेटे के सम्मान की राशि नहीं मिली। इसके बाद से मां सावित्री सक्सेना इसके लिए भटक रही है।  सरोजनीनगर में मंगलवार को तहसील दिवस में भी वह प्रार्थना पत्र लेकर पहुंचीं।
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उन्होंने कहा कि बात पैसे की नहीं है। यह राशि मेरे बेटे की कुर्बानी को दिया गया सम्मान है, जिसके लिए हम भटक रहे हैं। कहा कि बुधवार को बेटे की 17वीं पुण्यतिथि है। ऐसे में शासन-प्रशासन की यह बेरुखी निराश करती है।

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आईजीआरएस में भी हो चुकी है शिकायत

शहीद विवेक (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
दस लाख है एकमुश्त सम्मान राशि
प्रदेश के अशोक चक्र शृंखला के पदकों से विभूषित नागरिकों के लिए 6 मई 1999 में जारी शासनादेश के अनुसार शौर्य चक्र पदक पाने वालों के लिए दस हजार रुपये एकमुश्त राशि व 200 रुपये वार्षिकी की राशि देने का प्राविधान था। वर्ष 21 सितंबर 2008 को जारी आदेश के अनुसार शौर्य चक्र के लिए एकमुश्त राशि दस लाख व वार्षिकी 50 हजार रुपये कर दी गई।

शहीद विवेक के मरणोपरांत परिवारीजनों को धनराशि दिलाने का अनुरोध आईजीआरएस पर भी किया गया था। राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार स्वाती सिंह ने इस संबंध में पत्र लिखा था। जवाब में शासन की ओर से बताया गया कि 12 मार्च 2019 को डीएम लखनऊ से मामले में स्पष्ट प्रस्ताव/संस्तुति मांगी गई है। इसके प्राप्त होने पर कार्यवाही की जाएगी। हालांकि अभी तक परिवारीजनों को राशि नहीं मिली।

मंगलवार को पहली बार तहसील दिवस में शिकायत मिली है। तहसील स्तर पर संचालित कल्याणकारी योजना के साथ सेना प्रशासन के स्तर से मिलने वाली अन्य संभव मदद दिलवाने का भी पूरा प्रयास करेगा। इसकी प्रक्रिया बुधवार से शुरू होगी। - प्रफुल्ल त्रिपाठी, एसडीएम सरोजनी नगर  

सरहद पर जवान कठिन हालातों में डटे रहते हैं। ऐसे में सरकारों की भी जिम्मेदारी है कि भेदभावपूर्ण रवैया न अपनाया जाए। मणिपुर के शहीद के परिवारीजनों को सभी सुविधाएं तत्काल दी जानी चाहिए। - मेजर आशीष चतुर्वेदी, अध्यक्ष, उत्तर प्रदेश सैनिक संघ
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