पता नहीं यह नरेन्द्र मोदी का अति उत्साह था अथवा उन्हें भाजपा के अंदरूनी हालात की जानकारी नहीं है। या फिर जानबूझकर तथ्यों को नजरंदाज करने की चालाकी।
मोदी ने पटना की रैली में कहा,‘हमारे कांग्रेसी मित्रों को हमारी इस बात पर बहुत आपत्ति है कि मैं उनके एक नेता को शहजादे कहता हूं।
मैं अपने कांग्रेसी मित्रों की भावनाओं का ख्याल रखते हुए उनके इस युवा नेता को शहजादे कहना छोड़ सकता हूं। बशर्ते कांग्रेस वंशवाद व परिवारवाद छोड़ दे।’
पता नहीं मोदी को कांग्रेस के सामने यह चुनौती रखते वक्त यह तथ्य क्यों नहीं ध्यान में रहा कि यूपी में उनकी रैलियों में मंच की शोभा बढ़ाने वालों में कई ऐसे नेता शामिल हैं जो अपने-अपने शहजादों के समुचित समायोजन के लिए रात-दिन संघर्षरत है।
यह नेता भी उस ‘शहंशाह’ से किसी मामले में कम नहीं हैं। जिस पर बहराइच में मोदी ने निशाना साधते हुए कहा था कि इस शहंशाह को सिर्फ अपने परिवार की चिंता है, आप लोगों की नहीं।
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भाजपा के एक युवा कार्यकर्ता ने बातचीत में इस दोहरे रवैये पर सवाल उठाया है। कहा कि कांग्रेस व सपा में भले मोदी ने अलग-अलग शहजादा और शहंशाह देखा हो।
पर, दोनों को एक साथ देखना हो तो सबसे अच्छा उदाहरण भाजपा हैं। हमारी इस पार्टी में दोनों खूबियां एक साथ मौजूद हैं।
शंहशाह के रूप में यह अपने शहजादों को भाजपा में पदाधिकारी भी बनवाने को सक्रिय रहते हैं और चुनाव में टिकट दिलाने को भी।
अगर मोदी का निशाना बना ‘शहंशाह’ पुत्र के अतिरिक्त कुछ नहीं सोच पा रहा है तो यही कौन से कम हैं। पता नहीं कितने युवा इनके शहजादों केचक्कर में सड़कों पर चप्पल घिस रहे हैं।
यह है यूपी की तस्वीर
राजनाथ सिंह पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। वह मोदी की हर सभा में उनके साथ भी रहते हैं। पटना में भी वह मौजूद थे।
सिंह के पुत्र पंकज सिंह भाजपा में इस समय प्रदेश महामंत्री हैं। यही नहीं, पंकज सिंह सूर्यप्रताप शाही की अध्यक्षता वाली प्रदेश कमेटी में मंत्री थे।
जिन्हें चुनाव के समय तरक्की देकर महामंत्री बना दिया गया था। सिर्फ पंकज सिंह नहीं बल्कि पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के पुत्र राजवीर सिंह भी पार्टी में प्रदेश उपाध्यक्ष हैं।
चर्चा यह भी है कि कल्याण सिंह राजवीर या उनकी पत्नी के लिए लोकसभा का टिकट भी चाहते हैं। पार्टी के एक अन्य वरिष्ठ नेता लालजी टंडन के पुत्र गोपाल टंडन भी पार्टी में प्रदेश उपाध्यक्ष हैं।
गोपाल टंडन विधानसभा का पिछला चुनाव भी लड़ चुके हैं। एक और वरिष्ठ नेता ओमप्रकाश सिंह और डॉ. रमापति राम त्रिपाठी के पुत्रों को लोकसभा के पिछले चुनाव में टिकट दिया गया था।
यही नहीं, पार्टी के वरिष्ठ नेता और कई पदों पर रह चुके सत्यदेव सिंह के पुत्र वैभव सिंह विधानसभा चुनाव में लखनऊ पूर्व सीट से टिकट के दावेदार थे।
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हालांकि बाद में कलराज मिश्र के मैदान में आ जाने से उनका पत्ता कट गया। वैभव सिंह अब युवा मोर्चा में पदाधिकारी हैं। प्रेमलता कटियार भी भाजपा की प्रमुख नेताओं में हैं। इनकी पुत्री नीलिमा कटियार पार्टी में प्रदेश मंत्री हैं।
भाजपा ने शुरू किया नई तरह का वंशवाद
मोदी ने जिस बहराइच में शहंशाह शब्द का पहली बार प्रयोग कर मुलायम सिंह यादव पर निशाना साधा।
संयोग यह कि भाजपा ने उसी बहराइच से वंशवाद के नए संस्करण की शुरुआत की। उनके बगल वाले मंच पर वह प्रतीक भूषण भी बैठे थे।
जो सपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह के पुत्र हैं। सपा से निष्कासित होने की कगार पर खड़े और आपराधिक छवि के नेता माने जाने वाले बृजभूषण ने अपने ‘शहजादे’ को सियासत में सक्रिय करने के लिए भाजपा को चुना।
हालांकि बृजभूषण अभी भाजपा में नहीं आए हैं। प्रतीक भूषण को मंच पर प्रतिष्ठापूर्ण स्थान दिया जबकि मोदी के भाषण तक प्रतीक भूषण पार्टी के प्राथमिक सदस्य तक नहीं थे।’ उन्हें मोदी के वापस लौटने के बाद सदस्यता दिलाई गई।