सिर्फ तीन अधिकारियों के भरोसे संस्कृति निदेशालय का पूरा फील्ड वर्क है। जिलों में सांस्कृतिक आयोजनों की रूपरेखा तय करने से लेकर निर्माण कार्य तक देखना पड़ना है।
इन अधिकारियों को निदेशालय केकाम भी निपटाने पड़ते हैं। उप्र संस्कृति निदेशालय में अधिकारियों की कमी का आलम यह है कि फील्ड वर्क ही नहीं आला अधिकारियों से लेकर शासन स्तर तक पर तमाम पद रिक्त पड़े हैं।
निदेशालय केएक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि भारत सरकार द्वारा प्रायोजित कार्यक्रम केतहत पंजीकरण अधिकारियों के पद पर आठ भर्तियां की गई थीं।
जिनकी जिम्मेदारी मूर्तियों के पंजीकरण की थी। पर, भारत सरकार ने इस संवर्ग को मृत(डेथ काडर) घोषित कर दिया है। आठ में से पांच अधिकारी रिटायर हो चुके हैं।
फिलहाल इस संवर्ग में डॉ. लवकुश द्विवेदी, बनारस के रत्नेश कुमार वर्मा और डॉ. एपी गौड़ सभी जिम्मेदारियों को उठाए हुए हैं।
प्रत्येक अधिकारी को 20 से अधिक जिलों की बागडोर सौंपी गई है। डॉ. गौड़ जुलाई में रिटायर हो रहे है, ऐसे में फील्ड वर्क के लिए सिर्फ दो अधिकारी ही शेष रह जाएंगे।
संस्कृति निदेशालय में अफसरों की कमी महज फील्ड वर्क में ही नजर नहीं आती।
बल्कि निदेशालय और शासन स्तर पर आला अधिकारियों केतमाम पद रिक्त हैं। इसके अतिरिक्त निदेशालय की स्वायत्त संस्थाओं में भी कई पद खाली हैं ।