दिल्ली के निजामुद्दीन इलाके में धार्मिक जलसे से कोरोना वायरस फैलने के अलर्ट के बाद पुलिस और प्रशासन ने मंगलवार को राजधानी की मस्जिदों की पड़ताल की तो चौंकाने वाली जानकारी मिली।
कैसरबाग की मरकजी मस्जिद, काकोरी के पलिया स्थित जामा मस्जिद और मड़ियांव के मुतक्कीपुर स्थित मकवा मस्जिद में बांग्लादेश, कजाकिस्तान और किर्गिस्तान से आए कुल 23 पुरुष व महिलाएं रह रही थीं। सबसे बड़ी बात यह कि इन विदेशी नागरिकों के बारे में मस्जिदों के मुतवल्ली और केयरटेकर ने स्थानीय पुलिस-प्रशासन के अधिकारियो को कोई सूचना तक नहीं दी थी।
पुलिस आयुक्त सुजीत पांडेय, मंडलायुक्त मुकेश मेश्राम, जिलाधिकारी अभिषेक प्रकाश ने तीनों मस्जिदों का निरीक्षण किया। पुलिस आयुक्त ने बताया कि सभी विदेशी नागरिक एक धार्मिक जलसे में शरीक होने लखनऊ आए थे।
कैसरबाग की मरकजी मस्जिद में कजाकिस्तान के 2 और किर्गिस्तान के 4 नागरिक ठहरे हुए थे। सभी ने पूछताछ में बताया कि वे दिल्ली से 13 मार्च को ट्रेन से लखनऊ पहुंचे थे। उन्हें दो अप्रैल को वापस जाना है। लखनऊ में धार्मिक जलसे के बाद उन्हें अन्य जगह भ्रमण करना था, लेकिन लॉकडाउन के चलते यहीं रुक गए।
एडीसीपी पश्चिम विकास चंद्र त्रिपाठी ने बताया कि सभी टूरिस्ट वीजा पर लखनऊ आए हैं। यहीं से जानकारी मिली कि धार्मिक जलसे के लिए आए बांग्लादेश के कुछ लोग मड़ियांव के मुतक्कीपुर स्थित मकवा मस्जिद और काकोरी के पलिया स्थित जामा मस्जिद में ठहरे हैं।
लखनऊ में आए लोग शामिल नहीं हुए थे निजामुद्दीन के जलसे में
पुलिस आयुक्त सुजीत पांडेय ने बताया कि राजधानी की मस्जिदों में मिले विदेशी नागरिक दिल्ली से ट्रेन से लखनऊ आए जरूर थे, लेकिन निजामुद्दीन अथवा किसी अन्य मस्जिद में आयोजित धार्मिक जलसे में शामिल नहीं हुए थे। वहीं, डीएम ने भी इस पड़ताल को रूटीन बताते हुए कहा कि इनका निजामुद्दीन के जलसे से कोई संबंध नहीं है।