सपा के एमएलसी की संख्या 50 से नीचे पहुंचते ही भाजपा सरकार की राह आसान हो जाएगी। इसके बाद पार्टी शिक्षक दल, निर्दल समूह, निर्दलीय, असंबद्ध व अपना दल (सोनेलाल) के सदस्यों को साधकर कोई भी बिल विधान परिषद में पास कराने की स्थिति में होगी।
इस्तीफा देने वालों में से कुछ को भाजपा फिर भेजेगी सदन
सूत्रों के मुताबिक, स्नातक सीट से भाजपा से टिकट मांग रहे सपा के एक मौजूदा एमएलसी का दो-चार दिन में ही भाजपा में शामिल होना तय है। इनका कार्यकाल अगले वर्ष अप्रैल तक है। इन एमएलसी से जुड़े एक विद्यालय को अनुदान पर लेकर उन्हें उपकृत भी किया जा चुका है।
सपा के एक एमएलसी के होर्डिंग पर सपा छोड़कर भाजपा में आने के बाद राज्यसभा सदस्य चुने गए नीरज शेखर की फोटो लगी है। इसे सपा एमएलसी की निष्ठा में बदलाव का संकेत माना जा रहा है।
सपा में लंबे समय से उपेक्षित एक अन्य ‘प्रतिभावान’ एमएलसी भी जाने वालों की लाइन में हैं। एक एमएलसी ऐसे भी हैं, जो कभी सपा अध्यक्ष के काफी विश्वासपात्र थे, पर कारोबारी मजबूरियां उन्हें अलग रास्ता पकड़ने के लिए मजबूर कर सकती हैं।
इधर, कुछ दिनों से सपा हाईकमान की नजर में इस एमएलसी की ‘स्वामी भक्ति’ भी संदिग्ध मानी जा रही है। सूत्रों का कहना है कि इस्तीफा देकर साथ आने वाले कुछ सदस्यों को भाजपा फिर से सदन में भेजेगी।