पूर्व केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री रशीद मसूद को मेडिकल में दाखिले के लिए चार साल की कैद हुई है।
प्रदेश में भी चिकित्सा शिक्षा का एक चर्चित मामला ऐसा है, जिसमें मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया के तत्कालीन अध्यक्ष केतन देसाई जैसे दिग्गज आरोपी बनाए गए।
मामला बरेली के श्रीराम मूर्ति स्मारक मेडिकल कॉलेज का है। जरूरी औपचारिकताएं पूरे किए बिना ही कॉलेज को नए बैच के दाखिले की इजाजत एमसीआई ने दे दी थी।
केतन देसाई और कॉलेज संचालक समेत सभी आरोपी अभी जमानत पर हैं। मुकदमा राजधानी की सीबीआई कोर्ट में चल रहा है। कोर्ट ने मामले में आरोपियों पर आरोप तय करने के लिए 15 अक्तूबर की तारीख तय की है।
सीबीआई जांच में खुलासा
आरोप है कि एमआरएम कॉलेज के वर्ष 2009-10 में पांचवें बैच के रिन्युअल के लिए एमसीआई तत्कालीन चेयरमैन केतन देसाई ने जोड़-तोड़ कर रिन्युअल करा दिया। मामला सीबीआई के पास पहुंचा।
सीबीआई ने पीजीआई की विशेषज्ञ टीम के साथ कॉलेज का निरीक्षण किया तो पाया कि नियमों के विरुद्ध कॉलेज का रिन्युअल किया गया है। कॉलेज में 27 शिक्षकों तथा 65 रेजिडेंट्स की कमी पाई गई।
जांच में आया कि कॉलेज प्रशासन ने 30 शिक्षकों तथा रेजिडेंट को पूर्णकालिक बताया था जबकि वे पूर्णकालिक नहीं थे।
रामदौस भी हैं आरोपी
बरेली के रुहेलखंड मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के मामले में पूर्व केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ए रामदौस आरोपी हैं। आरोप है कि उन्होंने 2009-09 में एमबीबीएस कोर्सेज में एडमिशन के रिन्यूवल में कॉलेज को गलत तरीके से फेवर किया था।
मामला लखनऊ की सीबीआई अदालत में हैं। इंदौर के भी एक मेडिकल कॉलेज को गलत तरीके से फायदा पहुंचाने का आरोप रामदौस पर है। उन्होंने दोनों मामलों को सुप्रीम कोर्ट में सुने जाने की अर्जी दी है।