लखनऊ। फर्जी नोटरी बनाकर बेचने वाले जालसाजों ने स्कैन कर मैनुअल स्टांप बनाए थे। बरामद 350 से अधिक मैनुअल स्टांप में 50 फीसदी फर्जी पाए गए हैं।
एसीपी गाजीपुर ए. विक्रम सिंह ने बताया कि स्टांप एवं निबंधन विभाग से जानकारी मांगी गई है कि आरोपी वेंडर सीतानाथ रथ और दीपक सिंह को कितने स्टांप जारी किए गए थे। जांच में पता चला है कि सीतानाथ के पास स्टांप वेंडर का लाइसेंस था। इसके लिए भी उपनिबंधक कार्यालय से पत्राचार कर उसकी सत्यता की जानकारी मांगी गई है।
एसीपी गाजीपुर के मुताबिक आरोपी के पास से बरामद फर्जी नोटरी को पुलिस ने लिखावट मिलान के लिए एफएसएल को भेजा है। नोटरी पर जिस अधिवक्ता के साइन मिले थे उनका कहना है कि साइन उनके नहीं हैं। आरोपी सतीनाथ ओडिशा और दीपक सिंह वाराणसी का रहने वाला है। दोनों के बारे में संबंधित पुलिस से भी संपर्क कर उनकी कुंडली खंगाली जा रही है। पुलिस का कहना है कि केस की विवेचना चल रही है। जरूरत पड़ने पर दोनों आरोपियों को आगे की पूछताछ के लिए रिमांड पर लिया जाएगा।
यह है पूरा मामला
गाजीपुर पुलिस ने केशव कॉम्प्लेक्स में एक दुकान में फर्जी नोटरी बनाने के धंधे का खुलासा करते हुए 6 दिसंबर को इंदिरानगर निवासी सीतानाथ और शक्तिनगर निवासी दीपक सिंह को गिरफ्तार किया था। दोनों के पास से 170 नोटरी, काफी संख्या में मैनुअल और ई स्टांप मिले थे।