मायाराज के दौरान मनरेगा में करीब 500 करोड़ रुपये के घोटाले में सीबीआई ने 5 एफआईआर दर्ज की हैं।
जांच के दायरे में दो दर्जन आईएएस और चार दर्जन पीसीएस अफसरों सहित करीब सौ अधिकारियों के अलावा इंजीनियर, कर्मचारी व जनप्रतिनिधि आ रहे हैं। एफआईआर दर्ज होने के बाद से ही अफसरों में हड़कंप है।
सीबीआई ने शुक्रवार को जिन 5 जिलों में हुए घोटालों में केस दर्ज किया, उनमें गोंडा, महोबा, सोनभद्र, बलरामपुर व कुशीनगर हैं।
मिर्जापुर में हुए घोटाले की एफआईआर सीबीआई की स्पेशल क्राइम ब्रांच जबकि संतकबीरनगर के लिए देहरादून की एंटी करप्शन शाखा दर्ज करेगी। दोनों एफआईआर का ड्राफ्ट तैयार कर लिया गया है।
हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने पिछले दिनों मनरेगा के तहत केंद्र से मिली राशि में धांधली संबंधी एक पीआईएल पर सीबीआई को जांच का आदेश दिया था।
सभी मामले वर्ष 2007 से 2010 के दौरान के हैं। पहले इस घोटाले की जांच आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) कर रही थी, लेकिन उसकी जांच से हाईकोर्ट संतुष्ट नहीं हुई।
इसके बाद अदालत ने सीबीआई को जांच सौंपी थी। इसके बाद सीबीआई ने शुक्रवार को अलग-अलग पांच एफआईआर दर्ज किया।
अन्य जिलों में भी नए सिरे से होगी जांच
हाईकोर्ट ने मनरेगा में अन्य जिलों में भी हुई गड़बड़ियों की जांच के आदेश दिए हैं।
सीबीआई वहां के तत्कालीन डीएम, सीडीओ सहित अन्य कई अफसरों से नए सिरे से पूछताछ करेगी। आरोप है कि इन अफसरों ने बेरोजगारों के बजाय अपने करीबियों को काम दिलाया।
एनजीओ को फायदा पहुंचाया गया। काम में मजदूरी और सामग्री के 60-40 के अनुपात पर भी ध्यान नहीं दिया गया।
मनरेगा की रकम से कई ऐसे किसानों को बीज बांट दिए गए जिनके पास जमीन ही नहीं थी। गोंडा में तो मनरेगा की रकम से टेंट की खरीद ली गई।