राजधानी लखनऊ के गोमतीनगर स्थित मनीषा मंदिर बाल संरक्षण गृह में बड़े पैमाने खामियों के उजागर होने पर सरकार के स्तर पर संस्था का पंजीकरण रद्द करने की तैयारी शुरू हो गई है। इसी कड़ी में महिला एवं बाल कल्याण मंत्री डॉ. रीता बहुगुणा जोशी ने बाल कल्याण समिति से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। रिपोर्ट के परीक्षण के बाद संस्था का पंजीकरण रद किया जाएगा।
बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष कुलदीप रंजन ने बताया कि मनीषा मंदिर प्रकरण की प्रारंभिक जांच के बाद अब विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जा रही है। जांच में यह पाया गया है कि शहर के पॉश इलाके में सारे कायदे-कानून को ताक पर पिछले तीन दशक से मनीषा मंदिर बाल संरक्षण गृह का संचालन हो रहा था और अधिकारियों की नजर नहीं पड़ी। रिपोर्ट जल्द ही विभागीय मंत्री को सौंप दी जाएगी, इसके बाद संस्था का पंजीकरण रद्द किया जा सकता है।
इस संस्था में बाल कल्याण समिति न्यायलय के आदेश के बगैर ही 10 साल से कम उम्र की बच्चियों को यहा रखा गया था। संस्था की संचालिका डॉ. सरोजनी अग्रवाल के रसूख का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि देवरिया कांड के बाद मुख्यमंत्री के निर्देश पर प्रदेश के सभी बाल एवं महिला संरक्षण गृहों की जांच कराई गई थी, लेकिन इस संस्था की ओर किसी अधिकारी ने नजर उठाकर नहीं देखी।
इसका ही नतीजा था कि सरकार की सख्ती के बाद भी इस संस्था में10 साल से कम उम्र की आठ बच्चियों को नियमों के विरुद्ध और 6 बालिकाओं को न्यायालय बाल कल्याण समिति के आदेश के बगैर रखा गया था।