दुनिया में जेहाद के नाम पर कत्लेआम ही सबसे बड़ा आतंकवाद है। इस्लाम में जेहाद का मकसद है बचाव। इस्लाम के जेहाद के मकसद से अलग हट कर कत्लेआम करने वाले आतंकवादी हैं। ये बात इमामबाड़ा आगा बाकर में मौलाना मीसम जैदी ने कही।
मंगलवार को मजलिस-ए-गम पर सजे अय्याम-ए-अजा की तीसरी मजलिस को संबोधित करते हुए मौलाना मीसम जैदी ने कहा कि इस्लाम तलवार से नहीं रसूल अल्लाह के अखलाक और हजरत अली अलैहिस्लाम के इल्म से फैला है।
इस्लाम में आतंक की कोई जगह नहीं है। लेकिन इस्लाम विरोधी आतंकियों ने रसूल के बाद से आतंक की घटनाओं को अंजाम दिया जिसके खिलाफ नवासा ए रसूल हजरत इमाम हुसैन ने करबला में अपनी व अपने 72 साथियों की कुर्बानी पेश की।
मौलाना ने जब हजरत हुर्र की शहादत का बयान पेश किया तो यहां मौजूद अजादार रोने लगे।अफजल महल में मौलाना आगा रूही ने कहा कि करबला का गम और अहलेबैत से मोहब्बत ही इंसानियत को जिंदा रखे हैं।
जिस दिन यह खत्म हो गया सारी कायनात से इंसानियत खत्म हो जाएगी। मदरसा नाजमियां में मौलाना हमीदुल हसन ने मजलिस खिताब की।