अगर प्रदेश में सबसे ज्यादा अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों की मेजबानी करने वाले स्टेडियमों की बात की जाए, तो शहर के केडी सिंह बाबू स्टेडियम की छवि सभी के सामने उभरकर आएगी।
बावजूद इसके खेल विभाग का सबसे महत्वपूर्ण स्टेडियम दुर्दशा को अछूता नहीं रहा। स्टेडियम की आउटफील्ड और मेंटीनेंस के मामले में विभागीय अधिकारियों की लापरवाही साफ झलकती है, लेकिन ‘देर आए दुरस्त आए’ मुहावरे की तर्ज पर आखिरकार खेल विभाग का ध्यान स्टेडियम की बदहाली पर गया और अब यहां तकरीबन साठ लाख रुपए की लागत से इसे फिर से चमकाने की कवायद शुरू हो गई है।
इस संबंध में मंगलवार क्षेत्रीय क्रीड़ा विभाग की ओर स्टेडियम की आउटफील्ड के अलावा तमाम मेंटीनेंस के लिए दस लाख का इस्टीमेट निदेशालय के माध्यम से शासन को भेजने का फैसला किया गया है।