राममंदिर का नया ट्रस्ट कैसा हो, इसे लेकर जानकारों की राय लगभग एक जैसी है। सब चाहते हैं कि ट्रस्ट में न सिर्फ अयोध्या के बल्कि विश्व के दिग्गज संत-धर्माचार्य शामिल होने चाहिए। ट्रस्ट की व्यवस्था पारदर्शी होनी चाहिए, इसके लिए जरूरी है कि प्रबंधन के साथ एक-एक पाई का हिसाब के लिए सरकारी तंत्र विकसित हो। ट्रस्ट की ओर से श्रद्धालु को एक कप चाय से लेकर शिक्षा-स्वास्थ्य आदि सारा इंतजाम संचालित हो।
तिरुपति बालाजी ट्रस्ट जैसा हो राममंदिर ट्रस्ट का मॉडल
निर्मोही अखाड़े के वरिष्ठ अधिवक्ता रंजीत लाल वर्मा कहते हैं कि सुप्रीमकोर्ट के आदेश पर अब पीएमओ को ट्रस्ट की योजना बनानी है। इसमें रामानंदीय वैरागी संप्रदाय के 80 प्रतिशत सदस्य होने चाहिए। बाकी अपने-अपने क्षेत्र में विशिष्ट योगदान करने वाले सेवानिवृत्त अधिकारी व समाजसेवी हों। यह अनिवार्य हो कि वे वैष्णव हों, और मूर्तिपूजा करते हों। रंजीत लाल वर्मा ने कहा कि ट्रस्ट की जनरल बाड़ी के अलावा प्रबंध कार्यकारिणी में निर्मोही अखाड़े का वर्चस्व होना चाहिए।
इसका अध्यक्ष व सचिव समेत 7 या 11 की कार्यकारिणी में सभी पंचों को स्थान मिलना चाहिए। सारा हिसाब-किताब पारदर्शी होना चाहिए। वे कहते हैं कि सरकार को न ट्रस्ट में शामिल होने का अधिकार है न धन खर्च करने का। इसके लिए तिरुपति बालाजी ट्रस्ट का मॉडल अपनाया जा सकता है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट में अपर शासकीय अधिवक्ता मदन मोहन पांडेय कहते हैं कि केंद्र सरकार राममंदिर ट्रस्ट की स्कीम बनाने में पारदर्शिता का पूरा ख्याल रखेगी। वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड की तरह प्रशासकीय व्यवस्था देने के लिए सीईओ जैसा पद रख सकती है। पैसे का दुरुपयोग न हो, इसके लिए सख्त इंतजाम जरूर दिखेगा।
ट्रस्ट में स्थानीय शीर्ष संतों से लेकर जनप्रतिनिधियों को जगह दी जा सकती है। सरकार वैष्णो देवी ही नहीं, तिरुपति बाला जी, बद्रीनाथ के साथ शैव संप्रदाय के सोमनाथ मंदिर व काशी विश्वनाथ ट्रस्ट का भी मॉडल देखकर श्रीराममंदिर ट्रस्ट का स्वरूप तय करेगी।
सिविल मामलों के वरिष्ठ अधिवक्ता व ट्रस्टों के जानकार गोपाल कृष्ण मिश्र कहते हैं कि ज्यादातर संभावना बद्रीनाथ मंदिर ट्रस्ट का मॉडल अपनाए जाने की है। इसमें स्थानीय जनप्रतिनिधि से लेकर संत-धर्माचार्य तक शामिल हैं। सरकार तो कहीं से शामिल नहीं हो सकती, ऐसा पहले के मामलों में सुप्रीम कोर्ट का ही निर्देश है।
सरकार विस्तार से लेकर वित्तीय व्यवस्था साधु-संतों के हवाले न करके भले ही अपने हाथ में धर्मार्थ कार्य विभाग के जरिए रखेगी। उन्होंने कहा कि जल्द ही सरकार की स्कीम व शर्ते बनकर सामने आ जाएगी। सरकार की स्कीम में राममंदिर के नाम से चलने वाले ट्रस्टों की संपत्तियों को लेकर भी गाइड लाइन होगी।
ज्योतिषाचार्य पं. प्रवीण शर्मा कहते हैं कि ट्रस्ट का स्वरूप अंतरराष्ट्रीय होना चाहिए। देश-विदेश के शीर्ष धर्माचार्य शामिल होने चाहिए। अयोध्या अब नगर निगम ही नहीं, धाम की तरह विकसित होना चाहिए। राममंदिर इतना भव्य व विशाल बनना चाहिए कि इससे भारत की पहचान जुड़ सके।
राम के नाम पर जितने भी ट्रस्ट बने हैं, सबको अपनी संपत्ति राममंदिर के लिए दे देनी चाहिए। ट्रस्ट के जिम्में सिर्फ मंदिर का कार्य न हो, बल्कि यहां के विकास में अहम भूमिका तय होनी चाहिए। स्कूलों-कॉलेजों के संचालन के साथ अस्पताल आदि भी बनना चाहिए।