प्रदेश की राजधानी ‘लखनऊ एससीआर’ बनाने के सपने को भू-माफिया पहले ही चूर कर चुके हैं। शासन की घोषणा से पांच वर्ष पहले से ही भू-माफिया और अधिकारियों ने गठजोड़ कर ‘एससीआर’ केनाम पर जमीनों को बेचना शुरू कर दिया था।
एससीआर केनाम की ब्रांडिंग अवैध प्लाटिंग करने वालों के लिए वरदान बन गई। लखनऊ से लेकर बाराबंकी तक हजारों एकड़ खेती की जमीनों को बेचना आसान हो गया।
देखते ही देखते बीते पांच वर्ष में एक सैकड़ा से अधिक विल्डर्स ने यहां करोड़ों का व्यापार कर लिया। उसमें भी मुनाफा ऐसा कि एक बीघा जमीन लाखों में खरीदा और करोड़ों में बेच लिया।
पता चला जमीन की खरीद फरोख्त करने वाले रातोरात करोड़पति बन गए। इसके बाद शुरू हुआ बहुमंजिला इमारतों को बनाने का खेल।
लखनऊ महायोजना 2021 की परिधि में आने वाले लखनऊ के गांवों की जमीनों पर बहुमंजिला इमारतों को बनाया जाने लगा।
एलडीए की सीमा में आवासीय व व्यवसायिक टॉवर बनाने वाले विल्डर्स की अपेक्षा ग्रामीण अंचल में टॉवर बनाना ज्यादा सुविधाजनक हो गया।
जिला पंचायत से टॉवर के मानचित्र को पास करवा कर धडल्ले से आवासीय टॉवर बनाए जाने लगे। अनियोजित विकास की जमीनी हकीकत से वाकिफ होने केबाद भी शासन व प्रशासन ने संज्ञान नहीं लिया।
इस प्रस्ताव केसाथ ही लखनऊ एससीआर बनाए जाने की योजना का खाका खींचा गया था। न तो लखनऊ मेट्रो सिटी का दर्जा मिला और न ही एससीआर केतौर पर विकास को ही नियोजित किया गया।
शासन ने इस महत्वपूर्ण प्रस्ताव को मूर्तरूप तो नहीं दे पाया, पर नेताओं व अधिकारियों ने एससीआर की ब्रांडिंग को भुना लिया।
लखनऊ को पूर्वांचल समेत कानपुर, दिल्ली से जोड़ने वाले प्रमुख छह राजमार्ग समेत तीन स्टेट रोड़ पर बीस किमी की दूरी तक अनियोजित विकास की धूम मच गई।
बीते दो दशक में एलडीए और आवास विकास की कोई बड़ी आवासीय योजना राजधानी लखनऊ में नहीं शुरू हो पाई।
राजधानी की जनसंख्या बढ़ती गई, पर नई आवासीय कालोनियां यहां विकसित नहीं हो पाईं। लखनऊ में मकान व जमीन का सपना संजोने वालों की फेहरिस्त बढ़ती गई।
एलडीए व आवास विभाग में कार्यरत कर्मचारियों व अधिकारियों ने राजधानी में आवासीय सुविधा की कमी की नब्ज को पकड़ा। फिर क्या था भू-माफियों से गठजोड़कर खेती की जमीनों पर प्लाटिंग शुरू कर दी।
एलडीए ने महायोजना 2021 में गांवों को शामिल किया। पर इन गांवों को विकसित करने का खाका नहीं खींचा। हाल फिलहाल किसी योजना का खाका भी नहीं तैयार किया गया।
इधर भू-माफिया सक्रिय हो गए। लखनऊ सदर तहसील के30 से अधिक गांवों के किसानों को उनकी जमीने एलडीए द्वारा ले लिए जाने का खौफ दिखाकर औने पौने में खरीदना शुरू कर दिया।
बीते पांच वर्ष में फैजाबाद रोड़, देवा रोड़, चिनहट सतरिख रोड़ के गांवों के खेतों की जमीनों पर बहुमंजिला इमारतें खड़ी हो गईं। अब यहां इंच भर जमीन नहीं बची है।
मुख्य नगर एवं ग्राम नियोजक एसके जमा ने बताया कि प्रदेश केग्राम्य एवं नियोजन विभाग ने राजधानी सहित प्रस्तावित एससीआर में शामिल गांवों में निर्मित इमारतों का सर्वेक्षण करवाया जाएगा।
खेती योग्य जमीनों पर विकसित की गई बहुमंजिला इमारतों के मानचित्र की वैधता केअलावा निर्माण में मानकों की पड़ताल की जाएगी।