लखनऊ। किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) में फेफड़ा प्रत्यारोपण की तैयारी शुरू हो गई है। संस्थान में लंग ट्रांसप्लांट यूनिट के लिए एक्स्ट्राकाॅर्पोरियल मेंब्रेन ऑक्सीजनेशन (एक्मो) मशीन की खरीद प्रक्रिया आखिरी दौर में है। यह मशीन वेंटिलेटर बेअसर होने पर मरीज को सांस लेने में मदद करती है।
केजीएमयू के पल्मोनरी एंड क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग में फेफड़ा प्रत्यारोपण की सुविधा शुरू होनी है। इसमें कुछ समय लगता है। इस अवधि में मरीज को ऑक्सीजन देने के लिए एक्मो मशीन का सहारा लिया जाता है। एक्मो मशीन के माध्यम से ही सर्जरी के दौरान मरीज की सांस चलती रहती है। इसको देखते हुए विभाग में मशीन की खरीद की जा रही है। इस मशीन की कीमत करीब 40 लाख रुपये है।
डॉक्टर-पैरामेडिकल स्टाफ की करनी होगी तैनाती
केजीएमयू भले ही फेफड़ा प्रत्यारोपण की तैयारी कर रहा है, लेकिन इसमें कई चुनौतियां भी हैं। संस्थान में अभी तक प्रत्यारोपण के लिए कोई भी डॉक्टर तैनात नहीं है। डॉक्टर के साथ ही प्रशिक्षित पैरामेडिकल स्टाफ की भी कमी है। ऐसे में प्रत्यारोपण की गाड़ी अटक सकती है। हालांकि, केजीएमयू प्रवक्ता डॉ. सुधीर सिंह का कहना है कि जल्द ही भर्ती व्यवस्था शुरू की जाएगी। इसके बाद यहां फेफड़ा प्रत्यारोपण हो सकेगा। यह प्रदेश का पहला सरकारी संस्थान होगा, जहां यह सुविधा मिलेगी।
पहले की दो मशीनों पर दो मरीज ही हुए भर्ती
किसी मरीज के अंग जब वेंटिलेटर सपोर्ट के बावजूद ठीक से काम नहीं करते हैं, तब उसे एक्मो मशीन पर रखा जाता है। केजीएमयू में इस समय दो एक्मो मशीन हैं। पहली मशीन क्रिटिकल मेडिसिन विभाग में कोरोना महामारी से पहले खरीदी गई थी। दूसरी मशीन मेडिसिन विभाग में खरीदी गई थी। इन दोनों मशीनों पर अब तक सिर्फ दो मरीजों को ही सपोर्ट दिया गया है। अब तीसरी मशीन खरीदने की प्रक्रिया शुरू हुई है। मशीन की खरीद पर मुहर भी लगा दी गई है।