रात 1 बजे से 2:43 बजे तक चंद्रमा खग्रास अवस्था में रहेगा, जिसमे पूर्ण चांद ढंका रहेगा। ग्रहण की अवधि 3 घंटा 55 मिनट आंकी गई है। ज्योतिषियों का कहना है कि चंद्रग्रहण के समय भोजन, देव दर्शन, देव प्रतिमा स्पर्श आदि से बचना श्रेयस्कर रहता है।
चंद्रग्रहण मेष, सिंह, वृश्चिक और मीन राशि वालों के लाभकारक बताया जा रहा है, जबकि अन्य राशि कारक जातकों के लिये कष्टप्रद हो सकता है। आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा को ही गुरुपूर्णिमा गुरु पूजन व्यास पूजन का प्रसिद्ध पर्व भी मनाया जाएगा।
इसीलिए सूतक से पूर्व पूजन आदि करना उत्तम रहेगा। राजधानी समेत आसपास के लोगों के लिए बादलों की मौजूदगी चंद्रग्रहण देखने में परेशानी पैदा कर सकते हैं।
चंद्रग्रहण का सूतक लगने से शुक्रवार को दोपहर दो बजे से शहर के तमाम मंदिरों के कपाट बंद हो जाएंगे। हनुमान सेतु मंदिर के पुजारी भगवान विष्ट ने बताया कि दोपहर 2:54 बजे से सूतक लग जाएगा।
इसके बाद मंदिर के कपाट दर्शनों के लिए बंद कर दिए जाएंगे। कपाट शनिवार को सुबह खोले जाएंगे। हनुमान सेतु मंदिरों में चल रहा राम चरित मानस पाठ, भंडारा इसके पहले ही खत्म होगा। मनकामेश्वर, कल्याण गिरि, शनि मंदिर, कोनेश्वर मंदिर आदि मंदिरों में भी सूतक से पूर्व कपाट बंद हो जाएंगे।