फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

UP: सरकारी अस्पतालों में वेंटिलेटरों की जानकारी न पेश करने पर हाईकोर्ट सख्त, कहा- अहमियत समझें

Thu, 30 May 2024 12:27 AM IST
पंकज श्रीवास्‍तव अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ

सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने सख्त टिप्प्णी करते हुए कहा कि अफसर मामले की अहमियत को समझें। जवाब न देने पर कठोर आदेश दिया जाएगा।
विज्ञापन
- फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने बुधवार को प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में वेंटिलेटरों की जानकारी न पेश करने पर सख्त रुख अपनाया। कहा, पहले दिए गए आदेश के महीने भर बाद भी सरकारी वकील हमेशा की तरह पूरी जानकारी न मिलने की बात कहकर ब्यौरा पेश नहीं कर सके। न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति ओम प्रकाश शुक्ल की खंडपीठ ने नाराजगी जताते हुए कहा कि सरकारी अफसरों को मामले की अहमियत पर गौर करना चाहिए। जवाब न मिलने पर हम सख्त आदेश देंगे।

विज्ञापन


कोर्ट ने यह आदेश ''वी द पीपल'' संस्था के महासचिव प्रिंस लेनिन की वर्ष 2016 में दाखिल याचिका पर दिया। इसमें स्थानीय पीजीआई और केजीएमयू में वेंटिलेटरों की उपलब्धता का मुद्दा उठाया गया था। कोर्ट ने इस मामले को सुनवाई के लिए जुलाई के दूसरे हफ्ते में सूचीबद्ध करने का आदेश दिया। कहा कि अगर तब तक सरकार का जवाबी हलफनामा न पेश हुआ तो चिकित्सा स्वास्थ्य विभाग के विशेष सचिव स्तर के अफसर को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये सुनवाई के समय पेश होना होगा।

दरअसल, एक जनहित याचिका पर कोर्ट ने पहले राज्य सरकार से पूछा था कि प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में कितने वेंटिलेटर हैं? इनकी क्या स्थिति है? कोर्ट ने सरकारी वकील को हर जिले का ब्यौरा क्रमवार चार हफ्ते में पेश करने का आदेश दिया था। बुधवार को सुनवाई के समय मामले में राज्य सरकार की ओर से वांछित जवाबी हलफनामा नहीं पेश हो सका। इस पर कोर्ट ने सख्त आदेश देकर सरकारी वकील को इस आदेश से संबंधित अधिकारियों को अवगत कराने को कहा है।

विज्ञापन
विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें